मकर संक्रांति 2026 का महत्व – मकर संक्रांति पर तिल–गुड़ और दान का रहस्य जानिए शास्त्रों से इस दिन क्या करने से धन बढ़ता है?
मकर संक्रांति सिर्फ एक त्योहार नहीं है, बल्कि सूर्य, भाग्य और समृद्धि का दिव्य संगम है।
हर साल 14 जनवरी को जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है, तब पूरे वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन किए गए छोटे-से छोटे पुण्य कार्य भी सौ गुना फल देते हैं।
इसी कारण मकर संक्रांति को धन, सौभाग्य और नई शुरुआत का पर्व कहा जाता है।
- आज इस लेख में हम जानेंगे कि:
- मकर संक्रांति पर तिल–गुड़ क्यों खाया जाता है ?
- कौन-सा दान सबसे पुण्य देता है ?
- और क्या कहता है शास्त्र इसके बारे में ?
- भीष्मपिता से जुड़ी हुई मान्यता।
मकर संक्रांति पर तिल–गुड़ और दान का रहस्य जानिए शास्त्रों से

मकर संक्रांति वह पवित्र पर्व है जब सूर्य देव धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करते हैं।
ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को सभी ग्रहों का राजा माना गया है। सूर्य का मकर राशि में प्रवेश करना केवल एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि ऊर्जा, भाग्य और चेतना के परिवर्तन का संकेत होता है।
वेदों और ज्योतिष ग्रंथों में सूर्य को आत्मा (Soul), प्राण शक्ति (Life Energy) और समृद्धि (Prosperity) का कारक कहा गया है।
ऋग्वेद में सूर्य को “विश्व की आत्मा” कहा गया है, क्योंकि सूर्य के बिना जीवन संभव नहीं है।
महाभारत (अनुशासन पर्व) में बताया गया है किजब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है, तब क्या परिवर्तन होते हैं।
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दिन बड़े होने लगते हैं
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अंधकार कम होने लगता है
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सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती हइसी कारण इस काल को उत्तरायण कहा जाता है, जिसे देवताओं का समय माना गया है भगवद्गीता में भी उत्तरायण को मोक्ष और उन्नति का मार्ग बताया गया है। यही वजह है कि मकर संक्रांति के दिन किया गया दान, पूजा और सत्कर्म आदि का वधान निहित है।
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भगवद्गीता (अध्याय 8, श्लोक 24)
श्रीकृष्ण कहते हैं:
“अग्निर्ज्योतिरहः शुक्लः षण्मासा उत्तरायणम्…”
अर्थ: जो आत्मा उत्तरायण काल में शरीर त्यागती है, वह परम गति को प्राप्त होती है।
भीष्म पितामह को ईक्षा मृत्यु का वरदान था उन्होंने ने उत्तरायण की प्रतीक्षा क्यों की थी ?
महाभारत (भीष्म पर्व और अनुशासन पर्व) के अनुसार, भीष्म पितामह को इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त था। कुरुक्षेत्र युद्ध में शरशय्या पर पड़े होने के बावजूद उन्होंने अपने प्राण तुरंत नहीं त्यागे, बल्कि उत्तरायण काल आने तक प्रतीक्षा की।
कारण क्या था?
शास्त्रों में कहा गया है कि: भगवद्गीता (अध्याय 8) में भी श्रीकृष्ण उत्तरायण को परम गति प्राप्ति का काल बताते हैं। इसी विश्वास के कारण भीष्म पितामह ने उत्तरायण आने पर शरीर त्याग कर धर्म, त्याग और ज्ञान का आदर्श स्थापित किया।
उत्तरायण काल में शरीर त्यागने से आत्मा को परम गति प्राप्त होती है यह काल मोक्ष प्राप्ति का मार्ग को खोलता है।
शास्त्रों में मकर संक्रांति का प्रमाण इस प्रकार है।
🔱 ऋग्वेद का श्लोक के अनुसार:
मकर संक्रांति पर तिल–गुड़ और दान का रहस्य जानिए शास्त्रों से इस दिन ये काम करने से धन बढ़ता है
1. सूर्य को जल देना
आदित्य हृदय स्तोत्र में सूर्य को दरिद्रता नाशक कहा गया है।
सुबह तांबे के लोटे से जल देने से
👉 नौकरी
👉 व्यापार
👉 मान-सम्मान
तीनों बढ़ते हैं।
2. तिल-गुड़ का दान
गरुड़ पुराण में तिल को पाप नाशक कहा गया है। तिल दान करने से पुराने कर्म कटते हैं।
3. गाय और गरीब को भोजन
स्कंद पुराण कहता है —
जो संक्रांति पर अन्न दान करता है, उसके घर लक्ष्मी स्थायी होती है।
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मकर संक्रांति पर तिल–गुड़ और दान का रहस्य जानिए शास्त्रों से, तिल और गुड़ क्यों खाया जाता है?
यह सिर्फ परंपरा नहीं बल्कि आयुर्वेद और धर्म दोनों का नियम है। चरक संहिता में लिखा है:
सर्दी में तिल और गुड़ शरीर की अग्नि को मजबूत करते हैं। इसलिए आवश्य ही सेवन करना चाहिए
धार्मिक कारण:
गरुड़ पुराण के अनुसार तिल खाने से
👉 यमलोक के कष्ट कम होते हैं
👉 जीवन में आने वाली बाधाएँ हटती हैंगुड़ को लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इसे खाने से जीवन में मिठास और धन आता है।
मकर संक्रांति पर कौन-सा दान सबसे पुण्य देता है?
पद्म पुराण और भविष्य पुराण में लिखा है कि संक्रांति पर किया गया दान जन्म-जन्म के पाप काट देता है। यह दान सबसे श्रेष्ठ दान की गणना में आता है।
तिल दान – पाप नाश
गुड़ दान – दरिद्रता दूर
कंबल – ठंड से बचाकर पुण्य
अन्न दान – लक्ष्मी की कृपा
अगर कोई इस दिन भूखे को भोजन कराता है, तो उसके घर कभी अन्न की कमी नहीं होती।
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🌙 मकर संक्रांति की रात क्या करने से सौभाग्य खुलता है?
लक्ष्मी तंत्र में कहा गया है कि उत्तरायण की पहली रात लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करती हैं।
इस रात को ये विधान करना चाहिए।
1. घर के दरवाजे पर दीपक
दीपक नकारात्मक ऊर्जा जलाकर
लक्ष्मी को आकर्षित करता है।
2. लाल कपड़े में सिक्का
लाल किताब में यह धन रोकने का उपाय बताया गया है।
3. नमक का प्रयोग
नमक नकारात्मक ऊर्जा को खींचता है,
यह वास्तु शास्त्र में भी बताया गया है।
निष्कर्ष
मकर संक्रांति केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि सूर्य, आत्मा और भाग्य के जागरण का पर्व है। इस दिन किया गया दान, पूजा और सत्कर्म जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाता है।
📌 FAQ
Q1. मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है?
मकर संक्रांति उस दिन मनाई जाती है जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है और उत्तरायण काल शुरू होता है, जिसे शास्त्रों में अत्यंत शुभ माना गया है।
Q2. मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ क्यों खाते हैं?
गरुड़ पुराण के अनुसार तिल पापों का नाश करता है और गुड़ जीवन में मिठास व समृद्धि लाता है।
Q3. मकर संक्रांति पर कौन-सा दान सबसे शुभ है?
तिल, गुड़, अन्न और कंबल का दान इस दिन सबसे अधिक पुण्य देता है।
Q4. मकर संक्रांति की रात क्या करना चाहिए?
घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाना और लक्ष्मी माता का स्मरण करना बहुत शुभ माना जाता है।
Q5. क्या मकर संक्रांति से भाग्य बदल सकता है?
शास्त्रों के अनुसार उत्तरायण के पहले दिन किया गया सत्कर्म जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है।
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