26 जनवरी से जुड़े 10 रोचक तथ्य जो, हर भारतीय के लिए जानना जरुरी
26 जनवरी: भारत के गणतंत्र बनने की कहानी, महत्व और रोचक तथ्य भारत के इतिहास में 26 जनवरी सिर्फ एक तारीख नहीं है, बल्कि यह उस दिन का प्रतीक है जब भारत ने स्वयं को एक संप्रभु, लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में स्थापित किया। हर साल इस दिन को गणतंत्र दिवस के रूप में पूरे देश में गर्व और सम्मान के साथ मनाया जाता है।
- भारतीय संविधान बनने की कहानी: 2 साल 11 महीने की ऐतिहासिक प्रक्रिया।
- 26 जनवरी की तारीख पहले से तय थी संविधान बनने में लगे पूरे 2 साल 11 महीने
26 जनवरी 1930 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज की घोषणा की थी।इसी ऐतिहासिक कारण से संविधान लागू करने के लिए यही तारीख चुनी गई।
26 जनवरी से जुड़े 10 रोचक तथ्य हर भारतीय के लिए जानना जरुरी
संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई। आज़ादी से पहले ही देश के भविष्य की रूपरेखा तय करने का काम शुरू हो चुका था। लंबे विचार-विमर्श, बहस और संशोधनों के बाद 26 नवंबर 1949 को भारतीय संविधान को अंतिम रूप दिया गया।
इस दौरान संविधान सभा की 11 बैठकें हुईं और करीब 165 दिनों तक गहन चर्चा चली। देश के विभिन्न हिस्सों से आए 299 सदस्यों ने अलग-अलग सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण को सामने रखा, ताकि हर भारतीय को समान अधिकार मिल सकें।
संविधान के प्रारूप को तैयार करने में डॉ. भीमराव अंबेडकर और ड्राफ्टिंग कमेटी की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही। उन्होंने दुनिया के कई संविधानों का अध्ययन कर भारत की ज़रूरतों के अनुसार एक मजबूत और लोकतांत्रिक संविधान तैयार किया।
आख़िरकार 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू हुआ और भारत एक संपूर्ण गणतंत्र राष्ट्र बना। यही दिन आज हम गणतंत्र दिवस के रूप में गर्व के साथ मनाते हैं। भारतीय संविधान को तैयार करने में 2 साल, 11 महीने और 18 दिन लगे।
- संविधान हाथ से लिखा गया था। भारत का मूल संविधान कंप्यूटर से नहीं, बल्कि हाथ से लिखा गया है। इसे लिखने का काम प्रेम बिहारी नारायण रायज़ादा ने किया।
संविधान दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान है भारतीय संविधान दुनिया का है। सबसे लंबा लिखित संविधान है।
- पहला गणतंत्र दिवस साधारण था 1950 का पहला गणतंत्र दिवस। आज जैसा भव्य नहीं था, लेकिन उत्साह और गर्व पूरे देश में था

पहले गणतंत्र दिवस पर परेड जरूर हुई, लेकिन वह सीमित और सादगीपूर्ण थी। सैनिकों की टुकड़ियाँ, घुड़सवार दस्ता और कुछ झांकियाँ ही शामिल थीं। ईमेज AI उस दिन डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने भारत के पहले राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। इसके साथ ही भारतीय संविधान औपचारिक रूप से लागू हुआ और देश ने स्वयं को एक संपूर्ण गणतंत्र राष्ट्र घोषित किया।
पहले गणतंत्र दिवस पर परेड जरूर हुई, लेकिन वह सीमित और सादगीपूर्ण थी। सैनिकों की टुकड़ियाँ, घुड़सवार दस्ता और कुछ झांकियाँ ही शामिल थीं। संसाधन कम थे, देश नया-नया आज़ाद हुआ था, लेकिन लोगों के दिलों में आत्मसम्मान और उम्मीद भरी हुई थी।
सबसे खास बात यह थी कि यह उत्सव शक्ति प्रदर्शन का नहीं, लोकतंत्र की जीत का प्रतीक था। देश के नागरिक पहली बार अपने बनाए संविधान के तहत बराबरी और अधिकार के साथ आगे बढ़ रहे थे।
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26 जनवरी से जुड़े 10 रोचक तथ्य हर भारतीय के लिए जानना जरुरी1950 का पहला गणतंत्र दिवस हमें याद दिलाता है कि 👉 राष्ट्र की महानता दिखावे से नहीं, मूल्यों से बनती है।
- पहला राष्ट्रपति किस वाहन में आए थे? डॉ. राजेंद्र प्रसाद घोड़े से खींची गई बग्घी में गणतंत्र दिवस समारोह में पहुंचे थे। पहले गणतंत्र दिवस की ऐतिहासिक झलक थी।
26 जनवरी 1950 को भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद राष्ट्रपति भवन से घोड़े से खींची गई बग्घी में सवार होकर समारोह स्थल पहुँचे। यह बग्घी ब्रिटिश काल की परंपरा से जुड़ी थी, लेकिन उस दिन वह भारत के नए गणतंत्र की शान और गरिमा का प्रतीक बन गई।
- राजपथ का नाम पहले कुछ और था आज का कर्तव्य पथ जो,पहले राजपथ कहलाता था, और अंग्रेज़ों के समय इसे Kingsway कहा जाता था।
- हर साल किसी विशेष अतिथि को बुलाया जाता है गणतंत्र दिवस पर किसी एक देश के प्रमुख को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जाता है।
- पहली परेड का रूट अलग था। पहली गणतंत्र दिवस परेड जो, राष्ट्रपति भवन से शुरू होकर इंडिया गेट तक गई थी।
- 26 जनवरी सिर्फ एक दिन नहीं, एक व्यवस्था है यह दिन सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि संविधान, अधिकार और कर्तव्यों की याद दिलाने वाला दिन है।
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