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वट सावित्री व्रत जानिए सही तारीख विधि और पौराणिक व्रत कथा

वट सावित्री व्रत 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और पौराणिक व्रत कथा। वट सावित्री व्रत का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व।

वट सावित्री व्रत जानिए सही तारीख विधि और पौराणिक व्रत कथा। भारतीय संस्कृति में सुहागिन महिलाओं के लिए वट सावित्री व्रत का बहुत अधिक महत्व है। यह व्रत अखंड सौभाग्य, पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन माता सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प और पातिव्रत्य धर्म के बल पर यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस मांग लिए थे।

आइए जानते हैं कि साल 2026 में वट सावित्री व्रत कब है, इसका शुभ मुहूर्त क्या है और इसकी सही पूजा विधि क्या है।

वट सावित्री व्रत 2026 कब है? जानिए सही तारीख (Vat Savitri Vrat 2026 Date)

वट सावित्री व्रत की तारीख को लेकर अक्सर महिलाओं में थोड़ा असमंजस (confusion) रहता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में इसे दो अलग-अलग तिथियों पर मनाया जाता है:

उत्तर भारत में वट सावित्री व्रत (अमावस्या तिथि)

सही तारीख: 16 मई 2026 (शनिवार)

मुख्य क्षेत्र: उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, दिल्ली, पंजाब और राजस्थान। इन राज्यों में यह व्रत ज्येष्ठ मास की अमावस्या को रखा जाता है। इस बार शनिवार के दिन अमावस्या होने से इसका महत्व और बढ़ गया है, क्योंकि आज ही शनि जयंती भी है।

महाराष्ट्र और गुजरात में वट पूर्णिमा व्रत (पूर्णिमा तिथि)

  • सही तारीख: 31 मई 2026 (रविवार) “साल 2026 के सटीक पंचांग और शुभ मुहूर्त द्रिक पञ्चाङ्ग के अनुसार। 

  • मुख्य क्षेत्र: महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत के राज्यों में सुहागिनें इस व्रत को ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा के दिन रखती हैं, जिसे ‘वट पूर्णिमा’ कहा जाता है।

वट सावित्री व्रत का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व (Significance)

यह व्रत सिर्फ एक धार्मिक परंपरा नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरा वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक रहस्य भी छिपा है।

धार्मिक मान्यता: अखंड सौभाग्य का वरदान

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, वट (बरगद) के पेड़ में ब्रह्मा, विष्णु और महेश (शिव) तीनों देवों का वास माना जाता है। माता सावित्री ने भी बरगद के पेड़ के नीचे ही अपने पति को दोबारा जीवित किया था। इसलिए इस पेड़ की पूजा करने से वैवाहिक जीवन के सारे संकट दूर हो जाते हैं।

वैज्ञानिक महत्व: बरगद (वट) के पेड़ की पूजा क्यों?

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से बरगद का पेड़ पर्यावरण के लिए सबसे महत्वपूर्ण पेड़ों में से एक है। यह पेड़ सबसे ज्यादा ऑक्सीजन (Oxygen) छोड़ता है और इसकी आयु सैकड़ों वर्ष होती है। सुहागिन महिलाएं जब इसकी पूजा करती हैं, तो वे प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करती हैं और अपने पति के लिए भी बरगद जैसी ही ‘दीर्घायु’ (लंबी उम्र) की कामना करती हैं।

जानने के लिए  “वैज्ञानिक दृष्टिकोण से बरगद का पेड़ पर्यावरण के लिए सबसे महत्वपूर्ण है…” 

वट सावित्री व्रत जानिए सही तारीख विधि और पौराणिक व्रत कथा

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हाथ में कच्चा सूत या कलावा लें। बरगद के पेड़ के चारों ओर घूमते हुए सूत को तने पर लपेटें। आपको कम से कम 7 बार या अपनी श्रद्धा के अनुसार 108 बार परिक्रमा करनी चाहिए। इमेज आभार AI

वट सावित्री व्रत पूजा विधि और शुभ मुहूर्त 2026

  • कच्चा सूत (सफेद या सूती धागा) और कलावा

  • भीगे हुए चने और मौसमी फल (जैसे आम, लीची, खरबूजा)

  • बरगद के पेड़ की कोपलें (फल)

  • सिंदूर, रोली, अक्षत

  •  (चावल), धूप-दीप और घी का दीपक

  • सोलह श्रृंगार का सामान (मेहंदी, चूड़ियां, बिंदी आदि)

 

पूजा विधि (Step-by-Step Puja Vidhi)

स्नान और श्रृंगार: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और लाल या पीले रंग के सुंदर वस्त्र पहनकर पूरा सोलह श्रृंगार करें।

संकल्प लें: घर के मंदिर में दीया जलाकर व्रत का संकल्प लें।

वट वृक्ष की पूजा: बरगद के पेड़ के पास जाएं। वहां पेड़ की जड़ में जल अर्पित करें। इसके बाद रोली, अक्षत और सिंदूर लगाएं।

भोग लगाएं: भीगे हुए चने, फल और मिठाई पेड़ पर अर्पित करें।

परिक्रमा (सबसे महत्वपूर्ण): हाथ में कच्चा सूत या कलावा लें। बरगद के पेड़ के चारों ओर घूमते हुए सूत को तने पर लपेटें। आपको कम से कम 7 बार या अपनी श्रद्धा के अनुसार 108 बार परिक्रमा करनी चाहिए।

पंखा झलना: बांस के पंखे से वट वृक्ष को हवा करें और अपने पति की लंबी उम्र की प्रार्थना करें।

कथा सुनना: पेड़ के नीचे बैठकर सावित्री-सत्यवान की पौराणिक कथा जरूर सुनें या पढ़ें।

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सावित्री और सत्यवान की पौराणिक व्रत कथा (Vat Savitri Vrat Katha)

मद्र देश के राजा अश्वपति की पुत्री ‘सावित्री’ का विवाह राजा द्युमत्सेन के पुत्र ‘सत्यवान’ से हुआ था। सत्यवान अल्पायु (कम उम्र वाले) थे। नारद जी ने सावित्री को पहले ही बता दिया था कि विवाह के ठीक एक वर्ष बाद सत्यवान की मृत्यु हो जाएगी। इसके बावजूद सावित्री ने सत्यवान से ही विवाह किया।

जब वह अंतिम दिन आया, तो सत्यवान जंगल में लकड़ी काटने गए और अचानक उनके सिर में तेज दर्द हुआ और वे बरगद के पेड़ के नीचे सावित्री की गोद में लेट गए। तभी वहां प्राण लेने के लिए साक्षात यमराज आए। यमराज जैसे ही सत्यवान के प्राण लेकर जाने लगे, सावित्री भी उनके पीछे-पीछे चल दीं।

यमराज ने उन्हें बहुत रोका और कहा कि यह प्रकृति का नियम है। लेकिन सावित्री ने अपने पातिव्रत्य धर्म की बातें कीं, जिससे प्रसन्न होकर यमराज ने उनसे तीन वरदान मांगने को कहा (पति के प्राणों को छोड़कर)।

  • पहला वरदान: सावित्री ने अपने सास-ससुर की आंखों की रोशनी मांगी।

  • दूसरा वरदान: उनका खोया हुआ राज्य वापस मांगा।

  • तीसरा वरदान: सावित्री ने बड़ी चतुराई से ‘सौ पुत्रों की माता’ बनने का वरदान मांग लिया।

यमराज ने बिना सोचे ‘तथास्तु’ कह दिया। तब सावित्री ने कहा कि प्रभु, मैं एक पतिव्रता नारी हूं, पति के बिना मैं मां कैसे बन सकती हूं? अपनी बात में फंस चुके यमराज को मुस्कुराना पड़ा और उन्होंने सत्यवान के प्राण वापस लौटा दिए। सावित्री भागकर उसी बरगद के पेड़ के पास आईं, जहां सत्यवान जीवित होकर उठ बैठे। तभी से इस व्रत की परंपरा चली आ रही है।

 

वट सावित्री व्रत के नियम: भूलकर भी  ये गलतियाँ न करें। 

  • रंगों का चुनाव: इस दिन भूलकर भी काले, नीले या सफेद रंग के कपड़े या चूड़ियां न पहनें। सुहाग के काम में लाल, पीला, हरा या गुलाबी रंग ही सबसे शुभ होता है।

  • परिक्रमा का नियम: जब आप पेड़ की परिक्रमा कर रही हों, तो बीच में बात न करें और न ही परिक्रमा को अधूरा छोड़ें।

  • बड़ों का सम्मान: पूजा पूरी होने के बाद अपने घर के बुजुर्गों (सास-ससुर) और अपने पति के पैर छूकर आशीर्वाद लेना न भूलें।

 

Frequently Asked Questions (FAQs) – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q1.वट सावित्री व्रत में किस पेड़ की पूजा की जाती है और क्यों? Answer: इस दिन बरगद (Vat Vriksha) के पेड़ की पूजा की जाती है, क्योंकि इसमें त्रिदेव का वास होता है और माता सावित्री ने इसी पेड़ के नीचे अपने पति के प्राण वापस पाए थे।

Q2. यदि घर के आस-पास बरगद का पेड़ न हो तो पूजा कैसे करें? Answer: अगर पास में पेड़ न हो, तो आप बाजार से बरगद की एक छोटी टहनी मंगाकर उसे घर के गमले में स्थापित कर सकती हैं और वहां पूरी विधि-विधान से पूजा कर सकती हैं।

Q3. वट सावित्री व्रत का पारण कैसे और क्या खाकर किया जाता है? Answer: पूजा संपन्न होने के बाद बरगद के पेड़ की एक कोपल (छोटा फल) और भीगा हुआ चना पानी के साथ निगलकर व्रत खोला जाता है। इसके बाद आप सात्विक भोजन कर सकती हैं।

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