दिल्ली-NCR के प्रसिद्ध मंदिर और उनका इतिहास भारत की समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा।
दिल्ली-NCR केवल राजनीतिक और आर्थिक केंद्र ही नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक है। यहाँ कई ऐसे प्राचीन और आधुनिक मंदिर हैं, जिनकी आस्था देश-विदेश तक फैली हुई है। आइए जानते हैं दिल्ली-NCR के प्रमुख मंदिरों और उनके इतिहास के बारे में।
1.अक्षरधाम मंदिर, दिल्ली
इतिहास:
अक्षरधाम मंदिर का निर्माण 2005 में बोचासनवासी श्री अक्षर पुरुषोत्तम स्वामिनारायण संस्था (BAPS) द्वारा किया गया। यह मंदिर भगवान स्वामिनारायण को समर्पित है और अपनी भव्य वास्तुकला, नक्काशी और सांस्कृतिक प्रदर्शनों के लिए प्रसिद्ध है। स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर दिल्ली में यमुना नदी के तट पर स्थित भव्य धार्मिक स्थल है। इसका उद्घाटन वर्ष 2005 में भारत के राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वारा किया गया। इस की वास्तुकला प्राचीन भारतीय शिल्पकला और आधुनिक इंजीनियरिंग का अद्भुत संगम है। इसके निर्माण में गुलाबी बलुआ पत्थर और सफेद संगमरमर का उपयोग किया गया है। अक्षरधाम परिसर भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और नैतिक मूल्यों को दर्शाता है।यहाँ सांस्कृतिक प्रदर्शनी, साहज आनंद जल शो और बोट राइड प्रमुख आकर्षण हैं। अक्षरधाम मंदिर देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आस्था व शांति का केंद्र है।
विशेषता:
-
पारंपरिक भारतीय शिल्पकला
-
यमुना नदी के तट पर स्थित
-
आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्र
2. कालकाजी मंदिर, दक्षिण दिल्ली
इतिहास:
कालकाजी मंदिर दिल्ली के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है। यह मंदिर देवी काली को समर्पित है और माना जाता है कि इसका उल्लेख महाभारत काल से जुड़ा है।
विशेषता:
-
नवरात्रि में विशेष भीड़
-
ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व
कालका मंदिर माँ काली के उग्र रूप माँ कालका को समर्पित प्रसिद्ध शक्तिपीठ है।यह मंदिर दिल्ली क्षेत्र में आस्था और शक्ति साधना का प्रमुख केंद्र माना जाता है।नवरात्रि के दौरान यहाँ विशेष पूजा, हवन और भंडारे आयोजित होते हैं।मान्यता है कि सच्चे मन से की गई पूजा से मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।मंदिर का वातावरण शांत और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर है। यहाँ दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।

3 . लोटस टेम्पल ( बहाई उपासना )
1986 में बना यह मंदिर बहाई धर्म से जुड़ा है। कमल के फूल के आकार में बना यह मंदिर शांति और एकता का प्रतीक माना जाता है।
विशेषता:
सभी धर्मों के लोगों के लिए खुला
विश्व के सबसे अधिक देखे जाने वाले धार्मिक स्थलों में शामिल
लोटस टेम्पल दिल्ली का प्रसिद्ध बहाई उपासना स्थल है। इसका निर्माण कमल के फूल के आकार में किया गया है, जो शांति और पवित्रता का प्रतीक है। यह मंदिर सभी धर्मों के लोगों के लिए समान रूप से खुला है।यहाँ किसी भी प्रकार की मूर्ति या पूजा-पाठ नहीं होती। मंदिर में पूर्ण शांति बनाए रखना अनिवार्य है। इसका वास्तुशिल्प विश्वभर में प्रसिद्ध है।लोटस टेम्पल 27 संगमरमर की पंखुड़ियों से बना है। इसे ईरान के वास्तुकार फरीबोर्ज़ सहबा ने डिज़ाइन किया था। यह दिल्ली के सबसे अधिक देखे जाने वाले पर्यटन स्थलों में से एक है। यहाँ आने वाले लोगों को मानसिक शांति और आत्मिक सुकून की अनुभूति होती है।
4. छतरपुर मंदिर, दिल्ली
इतिहास:
1974 में बने इस मंदिर को देवी कात्यायनी को समर्पित किया गया है। यह मंदिर परिसर भारत के सबसे बड़े मंदिर परिसरों में से एक माना जाता है।
विशेषता:
संगमरमर से निर्मित भव्य संरचना, शांत वातावरण
इस्कॉन मंदिर, ईस्ट ऑफ कैलाश
इतिहास:
इस्कॉन मंदिर की स्थापना 1998 में की गई थी। यह भगवान कृष्ण और राधा रानी को समर्पित है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध है। यह मंदिर भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी को समर्पित है।
मंदिर का संचालन इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शसनेस (ISKCON) द्वारा किया जाता है। यहाँ प्रतिदिन भजन, कीर्तन और आरती का आयोजन होता है। मंदिर का वातावरण अत्यंत शांत और भक्तिमय रहता है। यहाँ भगवद गीता और वैष्णव दर्शन का प्रचार किया जाता है। जन्माष्टमी जैसे पर्वों पर विशेष सजावट और आयोजन होते हैं। मंदिर परिसर में आध्यात्मिक प्रवचन और सत्संग आयोजित किए जाते हैं। यह स्थान श्रद्धालुओं के साथ-साथ पर्यटकों को भी आकर्षित करता है।
विशेषता:
भगवद गीता का प्रचारनियमित कीर्तन और प्रवचन।
और भी पढ़ें: पौस शुक्ल मास का अयोध्या में विशेष हलचल
5. हनुमान मंदिर, कनॉट प्लेस
इतिहास:
माना जाता है कि यह मंदिर महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। यह दिल्ली का सबसे प्राचीन हनुमान मंदिर माना जाता है।
विशेषता:
108 फीट ऊँची हनुमान प्रतिमामंगलवार और शनिवार को विशेष पूजा
6. श्री शीतला माता मंदिर, गुड़गांव (Gurugram)
इतिहास:
यह मंदिर माता शीतला को समर्पित है और हरियाणा व दिल्ली-NCR में अत्यंत श्रद्धा का केंद्र है। यहाँ दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।
विशेषता:
रोग निवारण से जुड़ी मान्यताएँ
नवरात्रि में विशेष आयोजन
निष्कर्ष (Conclusion)
दिल्ली-NCR के ये मंदिर न केवल धार्मिक आस्था के केंद्र हैं, बल्कि इतिहास, संस्कृति और वास्तुकला का भी अद्भुत संगम प्रस्तुत करते हैं। इन मंदिरों का संरक्षण और महत्व समझना हमारी सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने के लिए आवश्यक है।
कृपया अपनी प्रतिक्रिया साझा करें:
