World Radio Day 13 फ़रवरी इतिहास, महत्व और भविष्य।डिजिटल युग में AI कैसे रेडियो को बदल रहा है
World Radio Day हर साल 13 फ़रवरी को मनाया जाता है ताकि रेडियो के अमूल्य योगदान को याद किया जा सके और इसके महत्व को दुनिया भर में उजागर किया जा सके। यह दिन UNESCO (यूनाइटेड नेशंस एजुकेशनल, साइंटिफिक एंड कल्चरल ऑर्गनाइजेशन) द्वारा 2011 में घोषित किया गया था और इसे 2012 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने भी मान्यता दी।
इतिहास — World Radio Day क्यों मनाया जाता है?
World Radio Day का चुनाव इसलिए किया गया क्योंकि 13 फ़रवरी 1946 को ‘United Nations Radio’ की स्थापना हुई थी, जिसने विश्व स्तर पर रेडियो को एक महत्वपूर्ण संचार माध्यम के रूप में पहचान दिलाई।
यूनेस्को और संयुक्त राष्ट्र के सदस्यों का मानना है कि रेडियो जैसी सस्ती और व्यापक पहुंच वाला माध्यम लोगों को सूचना, शिक्षा और मनोरंजन देने के साथ समाज को जोड़ने का काम करता है।
आज भी रेडियो क्यों है सबसे भरोसेमंद माध्यम?
रेडियो को आज भी विश्व का एक सबसे विश्वसनीय और भरोसेमंद संचार माध्यम माना जाता है क्योंकि:
🔹 यह सस्ता और आसानी से सुलभ है — दूर-दराज के इलाकों तक भी पहुंचता है।
🔹 रेडियो पर सीधा समाचार और आपात सूचना तुरंत पहुंचती है, खासकर तब जब इंटरनेट या टीवी उपलब्ध नहीं होता।
रेडियो लोगों से सीधे जुड़ता है, स्थानीय संस्कृतियों और भाषाओं में संवाद करता है।
🔹 रेडियो ने समाज में शिक्षा, लोकतांत्रिक बहस और सांस्कृतिक समृद्धि को फैलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
इन सब कारणों से रेडियो आज भी डिजिटल युग में एक मजबूत और भरोसेमंद माध्यम बना हुआ है।
World Radio Day 2026 Theme क्या है?
विश्व रेडियो दिवस 2026 की थीम है:
Radio and Artificial Intelligence”
इस थीम का उद्देश्य रेडियो और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के बीच के रिश्ते पर ध्यान देना है — कैसे AI रेडियो प्रसारण, कहानी साझा करना और श्रोता के साथ जुड़ने के तरीके को बदल रहा है, परंतु रेडियो की “मानवीय आवाज़” की भूमिका अब भी अपरिवर्तित और महत्वपूर्ण है।
रेडियो ने भारत और दुनिया को कैसे बदला? वैश्विक स्तर पर
रेडियो ने 20वीं सदी में संचार की दुनिया में क्रांति ला दी। युद्धों के दौरान सूचना देने से लेकर शिक्षा और मनोरंजन तक, रेडियो ने समाज को जोड़ने का कार्य किया।
रेडियो ने:
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लोकतंत्र को मजबूत किया
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ग्रामीण क्षेत्रों तक शिक्षा पहुंचाई
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सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया
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वैश्विक घटनाओं की जानकारी तुरंत दी
भारत में रेडियो का योगदान
भारत में रेडियो की शुरुआत 1920 के दशक में हुई। 1936 में “ऑल इंडिया रेडियो (AIR)” की स्थापना हुई, जिसे आज “आकाशवाणी” के नाम से जाना जाता है।
भारत में रेडियो ने:
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स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान जागरूकता फैलाई
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ग्रामीण विकास कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया
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किसानों और विद्यार्थियों को जानकारी दी
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आपदा के समय राहत सूचना पहुंचाई
आज भी भारत में करोड़ों लोग रेडियो से जुड़े हुए हैं।
डिजिटल युग में रेडियो का महत्व आज के डिजिटल दौर में भी रेडियो की प्रासंगिकता खत्म नहीं हुई है, बल्कि यह और विकसित हुआ है।
पॉडकास्ट और ऑनलाइन रेडियो:
अब रेडियो केवल एफएम तक सीमित नहीं है। यह इंटरनेट रेडियो और पॉडकास्ट के रूप में भी उपलब्ध है।
मोबाइल ऐप्स के जरिए पहुंच:
स्मार्टफोन ऐप्स ने रेडियो को और अधिक सुलभ बना दिया है।
कम लागत में व्यापक पहुंच:
रेडियो अभी भी सबसे सस्ता और व्यापक माध्यम है।
भरोसे और मानवता की आवाज आज भी आवाज का जादू लोगों के दिलों को छूता है। अपने एंकर के पसंदीदा आवाज को सुनने के लिए लोग इंतजार करते हैं।
रेडियो में मानवीय आवाज की गर्माहट और विश्वास होता है, जो डिजिटल टेक्स्ट या सोशल मीडिया पोस्ट में अक्सर नहीं मिलता।
निष्कर्ष
World Radio Day केवल एक दिवस नहीं, बल्कि संचार की उस शक्ति का उत्सव है जिसने दुनिया को जोड़कर रखा है।
रेडियो ने इतिहास बदला, समाज को जोड़ा और आज भी डिजिटल युग में अपनी जगह बनाए हुए है।
13 फरवरी को World Radio Day मनाना हमें यह याद दिलाता है कि “तकनीक बदल सकती है, लेकिन भरोसे की आवाज हमेशा जिंदा रहती है।”
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