राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और बदलते पद्म सम्मान: जमीनी नायकों को मिलता नया सम्मान
लेखक: अर्चना श्रीवास्तव।
भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, ‘पद्म पुरस्कार’, एक बार फिर चर्चा में हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों इन पुरस्कारों का दिया जाना केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि उन ‘जमीनी नायकों’ का जश्न है जिन्होंने बिना किसी शोर-शराबे के समाज को बदलने का बीड़ा उठाया है।
सत्ता के गलियारों से दूर, जनमानस की सेवा
पिछले कुछ वर्षों में हमने पद्म पुरस्कारों के चयन में एक स्पष्ट बदलाव देखा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी का कार्यकाल इस मायने में विशेष है कि यहाँ व्यक्तिगत प्रभाव के बजाय ‘निस्वार्थ सेवा’ को प्राथमिकता दी जा रही है। आज जब हम पुरस्कार विजेताओं की सूची देखते हैं, तो हमें बड़े नामचीन हस्तियों के साथ-साथ वे चेहरे भी दिखाई देते हैं, जो अपनी पूरी जिंदगी किसी एक विशेष कला, शिक्षा के प्रचार या स्वास्थ्य सेवा में बिता चुके हैं।
राष्ट्रपति मुर्मू का दृष्टिकोण: एक सरल पृष्ठभूमि की गहरी समझ
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू स्वयं एक अत्यंत सामान्य और संघर्षपूर्ण पृष्ठभूमि से आती हैं। उन्होंने अपने जीवन में अभावों को करीब से देखा है, इसीलिए उनके द्वारा दिए जाने वाले सम्मानों में एक ‘मानवीय जुड़ाव’ महसूस होता है। जब वे किसी ऐसे व्यक्ति को सम्मानित करती हैं जिसने आदिवासी संस्कृति को बचाया है या जो किसी दूर-दराज के गांव में साक्षरता फैला रहा है, तो ऐसा लगता है कि देश का शीर्ष पद वास्तव में उन लोगों को गले लगा रहा है जो भारत की असली नींव हैं।
पुरस्कारों का बदलता स्वरूप: योग्यता को मिली पहचान
पहले अक्सर यह माना जाता था कि पद्म पुरस्कार केवल विशेष पहुंच वाले लोगों को मिलते हैं। लेकिन अब यह मिथक टूट रहा है।
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अनसंग हीरोज़ (Unsung Heroes): अब पुरस्कार पाने वालों में ऐसे लोग शामिल हैं जो मिट्टी से जुड़े हुए हैं।
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पारदर्शिता: चयन प्रक्रिया का अब डिजिटल होना और जमीनी रिपोर्ट के आधार पर नाम शॉर्टलिस्ट करना, इस पुरस्कार की गरिमा को नई ऊंचाई दे रहा है।
2026 में पुरस्कार वितरण समारोह हाल ही में संपन्न हुआ है, यहाँ उन प्रमुख हस्तियों की सूची है जिन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा सम्मानित किया गया है:
पूरी विडियो देखे:
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा प्रदान किए गए पद्म पुरस्कार: एक विशेष रिपोर्ट
राष्ट्रपति भवन के भव्य दरबार हॉल में 25 मई 2026 को आयोजित पद्म पुरस्कार वितरण समारोह ने एक बार फिर देश की सेवा और समर्पण की गौरवगाथा को नई ऊंचाइयों पर पहुँचा दिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा प्रदान किए गए ये सम्मान केवल पदक नहीं हैं, बल्कि उन गुमनाम नायकों और दिग्गज कलाकारों के प्रति कृतज्ञता है, जिन्होंने अपने क्षेत्रों में असाधारण कार्य किया है।
चाहे सिनेमा के ‘ही-मैन’ धर्मेंद्र जी का अविस्मरणीय योगदान हो या समाज सेवा में जुटीं पार्वती बरुआ जैसी व्यक्तित्व, हर नाम भारत की प्रगति की कहानी कहता है। इस विशेष रिपोर्ट में हम उन दिग्गजों और उनके कार्यक्षेत्र पर प्रकाश डालेंगे, जिन्होंने इस वर्ष पद्म पुरस्कारों के जरिए राष्ट्र का मान बढ़ाया है।
पद्म पुरस्कार 2026: प्रमुख विजेताओं की सूची।
| विजेता का नाम | सम्मान | क्षेत्र |
पुरस्कार प्राप्ति तिथि
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| सुश्री वैजयंतीमाला बाली | पद्म विभूषण | कला | 25 मई 2026 |
| श्री कोनिडेला चिरंजीवी | पद्म विभूषण | कला | 25 मई 2026 |
| श्री एम. वेंकैया नायडू | पद्म विभूषण | सार्वजनिक मामले | 25 मई 2026 |
| श्री धर्मेंद्र सिंह देओल | पद्म विभूषण | कला | 25 मई 2026 |
| श्री प्यारेलाल शर्मा | पद्म भूषण | कला | 25 मई 2026 |
| श्रीमती पार्वती बरुआ | पद्म श्री | समाज सेवा | 25 मई 2026 |
| श्री जागेश्वर यादव | पद्म श्री | समाज सेवा | 25 मई 2026 |
विजेताओं के असाधारण कार्य: एक संक्षिप्त झलक
पद्म पुरस्कार पाने वाले इन दिग्गजों का सफर हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है:
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सुश्री वैजयंतीमाला बाली (कला): भारतीय शास्त्रीय नृत्य और अभिनय की दुनिया में इनका योगदान अद्वितीय है। दशकों तक अपनी कला के माध्यम से इन्होंने भारतीय संस्कृति को वैश्विक मंच पर गौरवान्वित किया है।
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श्री कोनिडेला चिरंजीवी (कला): सिनेमा में अपने शानदार अभिनय के साथ-साथ, इन्होंने जन-सेवा के क्षेत्र में भी जो काम किया है, वह लाखों लोगों के लिए एक मिसाल है।
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श्री एम. वेंकैया नायडू (सार्वजनिक मामले): दशकों तक राजनीति और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहकर, देश की नीति-निर्धारण और विकास में इनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है।
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श्री धर्मेंद्र सिंह देओल (कला): भारतीय सिनेमा के ‘ही-मैन’ के रूप में प्रसिद्ध, इन्होंने अपने अभिनय से कई पीढ़ियों का मनोरंजन किया है। यह सम्मान उनके लंबे करियर और सिनेमाई विरासत को एक उचित सम्मान है।
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श्री प्यारेलाल शर्मा (कला): संगीत के क्षेत्र में इन्होंने जो यादगार धुनें दी हैं, वे आज भी लोगों की जुबान पर हैं। भारतीय संगीत में इनका योगदान कभी नहीं भुलाया जा सकता।
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श्रीमती पार्वती बरुआ (समाज सेवा): इन्हें ‘हाथी वाली दीदी’ के रूप में भी जाना जाता है। वन्यजीव प्रबंधन और हाथियों के संरक्षण के लिए इन्होंने अपना जीवन समर्पित कर दिया है।
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श्री जागेश्वर यादव (समाज सेवा): इन्होंने विशेष रूप से कमजोर जनजातियों के उत्थान के लिए अथक प्रयास किए हैं, ताकि समाज के अंतिम व्यक्ति तक शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं पहुँच सकें।
विजेताओं की विस्तृत जानकारी हेतु आधिकारिक पोर्टल: पद्म पुरस्कारों से संबंधित अधिक जानकारी और विजेताओं की संपूर्ण सूची देखने के लिए आप भारत सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।
हमारा और विशेष कंटेंट पढ़े: प्रियंका चोपड़ा का जादू और ऑस्कर विजेताओं 2026 की पूरी सूची
विजेताओं की पूरी सूची यहाँ देखें: Padma Awards Ministry of Home Affairs .
पद्म पुरस्कारों की बदलती गरिमा: कुछ अन्य पहलू
चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता: इस वर्ष के पुरस्कारों की सबसे बड़ी विशेषता इसकी पारदर्शी चयन प्रक्रिया रही है। अब पद्म पुरस्कारों के लिए कोई भी नागरिक खुद को या किसी अन्य योग्य व्यक्ति को नामांकित कर सकता है। यही कारण है कि आज हमें उन लोगों के नाम सुनने को मिल रहे हैं, जो सालों से दूर-दराज के क्षेत्रों में चुपचाप देश की सेवा कर रहे थे।
राष्ट्रपति मुर्मू का प्रेरक संबोधन: सम्मान समारोह के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संबोधन में ‘निस्वार्थ सेवा’ पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि असली पद्म वही है जो राष्ट्र के उत्थान में अपना सब कुछ समर्पित कर देता है। उनका यह संदेश न केवल विजेताओं के लिए, बल्कि भारत के हर युवा के लिए एक मार्गदर्शक का काम करता है।
युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा: जब हम धर्मेंद्र जी जैसे दिग्गज के साथ-साथ जागेश्वर यादव जैसे समाजसेवी को एक ही मंच पर देखते हैं, तो यह समझ आता है कि सफलता का पैमाना केवल पैसा या शोहरत नहीं, बल्कि ‘सामाजिक प्रभाव’ (Social Impact) भी है। यह लेख उन सभी पाठकों के लिए एक संदेश है जो अपनी छोटी-छोटी कोशिशों से बड़ा बदलाव लाने का सपना देखते हैं।
एक विशेष नोट: “पद्म पुरस्कार 2026 के लिए कुल 131 विभूतियों का चयन किया गया है। 25 मई को हुए समारोह में 66 हस्तियों को सम्मानित किया गया है। शेष विजेताओं के लिए आने वाले दिनों में और समारोह आयोजित किए जाएंगे, जहाँ अन्य गौरवशाली हस्तियों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी द्वारा सम्मानित किया जाएगा।”
मेरी राय
एक लेखक के तौर पर मैं इसे भारत के ‘लोकतांत्रीकरण’ के रूप में देखती हूँ। जब एक आम नागरिक, जो वर्षों से किसी गांव में साक्षरता फैला रहा है या अपनी कला को बचा रहा है, उसे राष्ट्रपति भवन में सम्मान मिलता है, तो यह संदेश जाता है कि लोकतंत्र में ‘योग्यता’ ही सबसे बड़ा गुण है।
राष्ट्रपति मुर्मू की कार्यशैली उन लोगों के लिए प्रेरणा है, जो छोटे स्तर से शुरुआत कर समाज में बड़ा बदलाव लाना चाहते हैं।
निष्कर्ष: सम्मान का असली अर्थ
“अंत में, पद्म पुरस्कारों का यह आयोजन हमें यह याद दिलाता है कि राष्ट्र की सेवा केवल बड़े पदों या ऊँचे ओहदों से ही नहीं होती, बल्कि निस्वार्थ समर्पण और अपने कार्य के प्रति अटूट निष्ठा से भी होती है। जब हम धर्मेंद्र जी जैसे सिनेमाई दिग्गज को या पार्वती बरुआ जैसी साहसी समाज सेविका को राष्ट्रपति भवन में सम्मानित होते देखते हैं, तो यह स्पष्ट हो जाता है कि प्रतिभा को किसी दायरे में नहीं बाँधा जा सकता।
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