मोदी 3.0: प्रमुख उपलब्धियां, चुनौतियां और नीतिगत विश्लेषण
केन्द्र में लगातार तीसरी बार मोदी सरकार के गठन के बाद से देश के विकास, नीतिगत फैसलों और सार्वजनिक सेवाओं को लेकर कई बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। किसी भी लोकतांत्रिक सरकार के कार्यकाल का सही मूल्यांकन उसके सकारात्मक फैसलों और प्रशासनिक चुनौतियों दोनों के निष्पक्ष विश्लेषण से ही संभव है।
आइए जानते हैं मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के प्रमुख सराहनीय कार्य और वे मुद्दे जिन्हें लेकर आलोचनाएं और जन-असंतोष देखा गया है।
1. प्रमुख उपलब्धियां और सराहनीय पहल (Major Achievements)
सरकार ने बुनियादी ढांचे, सामाजिक कल्याण और आर्थिक सुधारों के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं:
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वरिष्ठ नागरिकों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा: आयुष्मान भारत योजना का विस्तार करते हुए 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी बुजुर्गों को ₹5 लाख तक का मुफ़्त इलाज देने की शुरुआत की गई।
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आवास और बुनियादी सुविधाएँ: पीएम आवास योजना 2.0 के तहत ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में 3 करोड़ नए किफायती पक्के घरों के निर्माण को मंजूरी दी गई।
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कर्मचारियों के लिए यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS): सरकारी कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही मांगों को देखते हुए सुनिश्चित पेंशन प्रणाली को लागू किया गया।
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स्टार्टअप और टैक्स में राहत: नए उद्यमियों को बढ़ावा देने के लिए ‘एंजेल टैक्स’ को पूरी तरह समाप्त किया गया तथा मध्यम वर्ग के लिए नई कर व्यवस्था में स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाकर ₹75,000 किया गया।
- औद्योगिक विकास: देश भर में 12 नए इंडस्ट्रियल स्मार्ट शहरों की घोषणा और पीएम सूर्य घर योजना के तहत 1 करोड़ घरों को सौर ऊर्जा से जोड़ने की पहल सराहनीय रही।
2. मुख्य चुनौतियां और नीतिगत चिंताएं (Challenges & Concerns)
जहाँ एक तरफ कई कल्याणकारी योजनाएं लागू हुईं, वहीं दूसरी ओर कई प्रशासनिक और सामाजिक मोर्चों पर सरकार को आलोचना का सामना भी करना पड़ा:
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परीक्षा प्रणाली और पेपर लीक विवाद: NEET-UG और UGC-NET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में धांधली के आरोपों ने लाखों छात्रों और अभिभावकों के बीच राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की साख पर सवाल खड़े किए।
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रोजगार और युवाओं की अपेक्षाएं: इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेश के बावजूद युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण और स्थायी नौकरियों का अभाव बना हुआ है। इसके अलावा, सैन्य भर्ती की ‘अग्निवीर योजना’ को लेकर भी समीक्षा की मांग जारी है।
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रेलवे की स्थिति और यात्री सुरक्षा: हाल की रेल दुर्घटनाओं और आम एक्सप्रेस ट्रेनों के सामान्य व स्लीपर डिब्बों में अत्यधिक भीड़ को लेकर रेल मंत्रालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए।
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लैटरल एंट्री और सामाजिक न्याय का मुद्दा: नौकरशाही के उच्च पदों पर बिना आरक्षण प्रक्रिया के सीधी भर्ती (Lateral Entry) के विज्ञापन पर कड़ा विरोध हुआ, जिसके बाद सरकार को इसे वापस लेना पड़ा।
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बढ़ती महंगाई और कर का बोझ: दैनिक उपयोग की वस्तुओं और खाद्य सामग्री की कीमतों में वृद्धि से आम आदमी का बजट प्रभावित हुआ है, जिससे मध्यम वर्ग में असंतोष देखा गया।
निष्कर्ष (Conclusion)
मोदी सरकार का तीसरा कार्यकाल विकास और सुधारों की दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास कर रहा है, लेकिन साथ ही रोजगार, शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और महंगाई जैसे मुद्दों पर सरकार के सामने बड़ी चुनौतियां भी हैं। किसी भी नीतिकारी व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वह जन-आकांक्षाओं और आलोचनाओं को ध्यान में रखकर अपने फैसलों में कितना सुधार लाती है।
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