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पुलिस FIR दर्ज नहीं कर रही? जानिए आपके कानूनी अधिकार

पुलिस FIR दर्ज नहीं कर रही? जानिए आपके कानूनी अधिकार। दिल्ली में पुलिस FIR दर्ज नहीं कर रही? जानिए क्या करें और आगे क्या करें (2026)

क्या आपकी शिकायत के बावजूद पुलिस थाने में FIR दर्ज नहीं की जा रही है? यदि हाँ, तो घबराने की आवश्यकता नहीं है। भारत का कानून प्रत्येक नागरिक को न्याय पाने का अधिकार देता है। यदि किसी संज्ञेय (Cognizable) अपराध की सूचना देने के बाद भी पुलिस FIR दर्ज नहीं करती है, तो आपके पास कई कानूनी विकल्प उपलब्ध हैं।

इस लेख में हम आसान भाषा में बताएंगे कि FIR क्या होती है, किन मामलों में FIR दर्ज होती है, पुलिस यदि FIR दर्ज करने से मना कर दे तो क्या करें और कानून आपको कौन-कौन से अधिकार देता है।

FIR क्या होती है?

FIR (First Information Report) यानी प्रथम सूचना रिपोर्ट। जब किसी संज्ञेय अपराध की जानकारी पुलिस को दी जाती है, तो पुलिस उस सूचना को लिखित रूप में दर्ज करती है। इसी दस्तावेज़ को FIR कहा जाता है। FIR दर्ज होने के बाद पुलिस मामले की जांच शुरू करती है।

किन मामलों में FIR दर्ज की जाती है?

सामान्यतः हत्या, लूट, बलात्कार, अपहरण, गंभीर मारपीट, दहेज उत्पीड़न, साइबर अपराध, धोखाधड़ी और अन्य संज्ञेय अपराधों में FIR दर्ज की जाती है। हालांकि हर मामले की परिस्थितियां अलग होती हैं और पुलिस उपलब्ध तथ्यों के आधार पर कार्रवाई करता है।

अगर पुलिस FIR दर्ज नहीं करे तो क्या करें?

दिल्ली में पुलिस FIR दर्ज नहीं कर रही? जानिए क्या करें

यदि आप दिल्ली में रहते हैं और किसी संज्ञेय अपराध की शिकायत के बावजूद पुलिस थाना आपकी FIR दर्ज नहीं कर रहा है, तो घबराने की आवश्यकता नहीं है। कानून आपको आगे की कार्रवाई के कई वैधानिक विकल्प देता है।

यदि पुलिस आपकी शिकायत सुनने के बाद भी FIR दर्ज नहीं कर रही है, तो घबराने की बजाय कानून द्वारा दिए गए अधिकारों का उपयोग करें।

1. थाना प्रभारी (SHO) को लिखित शिकायत दें

सबसे पहले अपनी शिकायत लिखित रूप में संबंधित थाने के SHO को दें। यदि संभव हो तो शिकायत की प्राप्ति रसीद या डायरी नंबर प्राप्त करें। यदि रसीद नहीं दी जाती है, तो शिकायत की एक प्रति अपने पास सुरक्षित रखें।

2. जिले के DCP (Deputy Commissioner of Police) को शिकायत भेजें

दिल्ली पुलिस में प्रत्येक जिले के लिए एक DCP नियुक्त होता है। यदि थाने में आपकी शिकायत पर कार्रवाई नहीं होती है, तो आप संबंधित जिले के DCP को अपनी शिकायत भेज सकते हैं। शिकायत के साथ सभी उपलब्ध दस्तावेज, फोटो, वीडियो या अन्य साक्ष्य संलग्न करें।

3. दिल्ली पुलिस की ऑनलाइन शिकायत सेवा का उपयोग करें

यदि थाने में सुनवाई नहीं हो रही है, तो आप दिल्ली पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट या ऑनलाइन शिकायत पोर्टल के माध्यम से भी शिकायत दर्ज कर सकते हैं। ऑनलाइन शिकायत करने के बाद प्राप्त शिकायत संख्या (Complaint Number) को सुरक्षित रखें।

4. किसी भी आपातकालीन स्थिति (Emergency) में तुरंत 112 नंबर पर कॉल करें।

यदि मामला तत्काल पुलिस सहायता का है या किसी व्यक्ति की जान-माल को खतरा है, तो तुरंत 112 पर कॉल करें। यह भारत की आपातकालीन सेवा है।

पुलिस अधिकारियों के खिलाफ शिकायत (Police Complaints Authority – PCA)

5. न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन करें

यदि पुलिस और वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क करने के बाद भी उचित कार्रवाई नहीं होती है, तो संबंधित न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष कानून के अनुसार आवेदन किया जा सकता है। आवश्यक परिस्थितियों में न्यायालय पुलिस को जांच या FIR दर्ज करने के संबंध में निर्देश दे सकता है।

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1. लिखित शिकायत दें

सबसे पहले अपनी शिकायत लिखित रूप में थाना प्रभारी (SHO) को दें। शिकायत में घटना की पूरी जानकारी लिखें जैसे –

  • घटना की तारीख और समय
  • घटना का स्थान
  • क्या हुआ
  • यदि आरोपी का नाम पता हो तो उसका नाम
  • उपलब्ध सबूत
  • गवाहों की जानकारी

यदि संभव हो तो शिकायत प्राप्त होने की रसीद या डायरी नंबर अवश्य लें।

2. पुलिस अधीक्षक (SP/SSP) से शिकायत करें

यदि थाने में आपकी FIR दर्ज नहीं होती है, तो आप जिले के पुलिस अधीक्षक (SP/SSP) को लिखित शिकायत भेज सकते हैं। शिकायत के साथ सभी आवश्यक दस्तावेज और सबूत भी संलग्न करें।

3. न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास जाएं।

यदि SP को शिकायत करने के बाद भी उचित कार्रवाई नहीं होती है, तो आप संबंधित न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन कर सकते हैं। कानून के अनुसार उचित परिस्थितियों में मजिस्ट्रेट पुलिस को जांच या FIR दर्ज करने के संबंध में निर्देश दे सकते हैं।

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भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) / CRPC की धारा के तहत न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास शिकायत दर्ज कराने का प्रावधान है।

दिल्ली जिला न्यायालय आधिकारिक पोर्टल (Delhi District Courts)

  • वेबसाइट: delhidistrictcourts.nic.in

  • विवरण: यहाँ से आप दिल्ली के सभी जिला न्यायालयों (जैसे तिहजारी, पटियाला हाउस, साकेत, द्वारका, रोहिणी, कड़कड़डूमा) की जानकारी, मजिस्ट्रेट कोर्ट की लिस्ट और ऑनलाइन सर्विसेज तक पहुँच सकते हैं।

2. ई-कोर्ट्स सेवा पोर्टल (e-Courts Services)

  • वेबसाइट: services.ecourts.gov.in

  • विवरण: यहाँ आप अपने केस का स्टेटस (Case Status), कोर्ट आर्डर, और कॉज़ लिस्ट (Cause List) ऑनलाइन देख सकते हैं।

जरूरी जानकारी: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) / CRPC की धारा के तहत न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास शिकायत दर्ज कराने (Private Complaint) के लिए आमतौर पर किसी अधिवक्ता (Lawyer) के माध्यम से संबंधित क्षेत्राधिकार वाले जिला न्यायालय (District Court) में आवेदन या याचिका दायर की जाती है।

4. ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें

आज कई राज्यों में ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने की सुविधा उपलब्ध है। अपने राज्य की आधिकारिक पुलिस वेबसाइट पर जाकर जानकारी प्राप्त करें और उपलब्ध होने पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें।

5. सभी सबूत सुरक्षित रखें

यदि आपके पास फोटो, वीडियो, मेडिकल रिपोर्ट, ऑडियो रिकॉर्डिंग, चैट, ईमेल या अन्य कोई सबूत हैं, तो उन्हें सुरक्षित रखें। ये आगे की कानूनी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

महत्वपूर्ण बात

यदि पुलिस FIR दर्ज नहीं कर रही है, तो कानून को अपने हाथ में न लें। शांतिपूर्वक और कानूनी तरीके से आगे बढ़ें। हर शिकायत और हर मामला अलग होता है, इसलिए कार्रवाई भी मामले के तथ्यों और लागू कानून के अनुसार होता है।

पुलिस को शिकायत देते समय किन बातों का ध्यान रखें?

  • हमेशा तथ्य लिखें।
  • झूठी जानकारी न दें।
  • शिकायत की एक प्रति अपने पास रखें।
  • सभी दस्तावेजों की फोटो कॉपी सुरक्षित रखें।
  • अधिकारियों से शालीनता और सम्मानपूर्वक बात करें।

क्या बिना वकील के शिकायत की जा सकती है?

हाँ। प्रारंभिक शिकायत कोई भी व्यक्ति स्वयं कर सकता है। हालांकि यदि मामला जटिल है या लंबे समय से कार्रवाई नहीं हो रही है, तो किसी योग्य अधिवक्ता से सलाह लेना बेहतर रहेगा।

क्या FIR दर्ज कराने के लिए कोई शुल्क देना पड़ता है?

नहीं। FIR दर्ज कराना पूरी तरह निःशुल्क प्रक्रिया है। यदि कोई व्यक्ति FIR दर्ज करने के बदले पैसे मांगता है, तो उसकी शिकायत संबंधित उच्च अधिकारियों से की जा सकती है।

क्या हर शिकायत पर FIR दर्ज होती है?

नहीं। कानून के अनुसार FIR मुख्य रूप से संज्ञेय अपराधों में दर्ज की जाती है। यदि मामला असंज्ञेय अपराध का है, तो उसकी प्रक्रिया अलग हो सकती है। इसलिए हर मामले का निर्णय उसके तथ्यों और कानून के अनुसार किया जाता है।

डिस्क्लेमर (Disclaimer)

 यह लेख केवल सामान्य कानूनी जानकारी और जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है। इसमें दी गई जानकारी विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों तथा लागू भारतीय कानूनों पर आधारित है। प्रत्येक मामले के तथ्य और परिस्थितियाँ अलग-अलग हो सकती हैं, इसलिए इस लेख को कानूनी सलाह (Legal Advice) के रूप में न लें।

यदि आपका मामला गंभीर या जटिल है, तो किसी योग्य अधिवक्ता से परामर्श लें। इस लेख का उद्देश्य किसी व्यक्ति, संस्था या पुलिस विभाग की छवि को नुकसान पहुँचाना नहीं है, बल्कि नागरिकों को उनके कानूनी अधिकारों और उपलब्ध वैधानिक प्रक्रियाओं की जानकारी देना है। लेख में दी गई जानकारी समय-समय पर कानूनों में होने वाले संशोधनों के अनुसार बदल सकता है।

 

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