अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026: ‘स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग’ और मानवता के लिए एक जरूरी विराम
लेखिका: अर्चना श्रीवास्तव दिनांक: 21 जून 2026
आज 21 जून को पूरी दुनिया 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को एक नए उत्साह और नई सीख के साथ मना रही है। भागदौड़ भरी जिंदगी और तकनीकी व्यस्तता के बीच, योग आज भी मानवता के लिए वह ‘ब्रीथेबल पॉज़ बटन’ (सांस लेने के लिए जरूरी विराम) बना हुआ है, जिसकी हमें सबसे ज्यादा जरूरत है।
2026 की थीम: स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग (Yoga for Healthy Ageing)
इस वर्ष की थीम, “स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग”, न केवल बुजुर्गों के लिए है, बल्कि उन सभी के लिए है जो एक गरिमापूर्ण और रोग-मुक्त जीवन की कामना करते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोलकाता की ऐतिहासिक रेड रोड से देश को संबोधित करते हुए कहा कि योग केवल शरीर को लचीला बनाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह बढ़ती उम्र के प्रभाव को कम करने और मानसिक स्पष्टता बनाए रखने की एक प्राचीन भारतीय कला है।
दशकों से सगली आ रही भारतीय संस्करण को चिह्नित करने के लिए, आंध्र प्रदेश सरकार गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के प्रयास का समन्वय कर रही है और 50 लाख से अधिक योग प्रमाणपत्र वितरित कर रही है। एक विशेष आकर्षण में आंध्र विश्वविद्यालय में 25,000 आदिवासी बच्चों द्वारा 108 मिनट में 108 सूर्य नमस्कार करना शामिल है। देश भर में, दिल्ली में 109 स्थानों पर कार्यक्रम पुरे उल्लास के साथ, जिसमें लाल किले पर एक भव्य कार्यक्रम भी शामिल है।
योगदा के लिए बढ़ते उत्साह को सोशल मिडिया से देख सकते हैं :
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क्यों है यह थीम आज के समय में जरूरी?
जैसे-जैसे हमारी जीवनशैली बदल रही है, तनाव और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियाँ कम उम्र में ही दस्तक देने लगी हैं। 2026 में, जब दुनिया एक स्वस्थ ‘हेल्थस्पैन’ (Healthspan) की तलाश में है, योग एक अनिवार्य स्तंभ के रूप में उभरा है।
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मानसिक शांति: बढ़ती उम्र के साथ अकेलापन और चिंता एक बड़ी चुनौती है। नियमित प्राणायाम और ध्यान मन को शांत रखते हैं।
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शारीरिक संतुलन: योग के आसन जोड़ों के दर्द और हड्डियों की मजबूती में सहायक हैं, जो वृद्धावस्था में सक्रिय रहने के लिए बहुत जरूरी है।
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निवारक चिकित्सा: गीता का श्लोक-“योगः कर्मसु कौशलम्” –हमें सिखाता है कि हर कार्य को कुशलता से करने के लिए मन की एकाग्रता जरूरी है, और योग ही वह मार्ग है।
कोलकाता से गूंजा योग का संदेश
कोलकाता के रेड रोड पर आयोजित मुख्य कार्यक्रम में लाखों लोगों ने एक साथ योग प्रोटोकॉल का पालन किया। यह दृश्य दिखाता है कि योग न केवल सीमाओं को पार कर चुका है, बल्कि यह भारत के ‘सर्वे संतु निरामया’ (सभी निरोगी रहें) के लोकाचार को वैश्विक धरातल पर चरितार्थ कर रहा है।
लेखक की कलम से: आपकी दिनचर्या में बदलाव
योग को अपने जीवन का हिस्सा बनाने के लिए बहुत बड़े बदलाव की जरूरत नहीं है। बस रोज सुबह 15 मिनट का समय निकालें। अनुलोम-विलोम और भ्रामरी जैसे प्राणायाम आपकी ऊर्जा को बनाए रखने के लिए चमत्कारिक हो सकते हैं। याद रखें, योग का उद्देश्य केवल शरीर को मोड़ना नहीं, बल्कि स्वयं से जुड़ना है।
आयुष मंत्रालय के सर्वेक्षण से पता चलता है कि भारत में लगभग हर चार में से एक व्यक्ति योग को अपनाता है
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