China Taiwan tension semiconductor supply chain impact on India

चीन-ताइवान तनाव और ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स जानिए भारत पर इसका असर

चीन और ताइवान तनाव: क्या फिर बढ़ सकती है ग्लोबल टेंशन? जानिए भारत की अर्थव्यवस्था पर इसका क्या होगा असर

 भूमिका (Introduction)

चीन-ताइवान तनाव और ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स जानिए भारत पर इसका असर। आज के वैश्वीकृत (Globalized) दौर में दुनिया के किसी भी कोने में तनाव बढ़ता है, तो उसकी गूंज पूरी दुनिया में सुनाई देती है। हाल के दिनों में चीन और ताइवान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक (Geopolitical) तनाव ने दुनिया भर के अर्थशास्त्रियों और विचारकों की चिंता बढ़ा दी है।

ताइवान न केवल पूर्वी एशिया का एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र है, बल्कि यह दुनिया की सेमीकंडक्टर (Semiconductor Chips) सप्लाई का सबसे बड़ा गढ़ भी है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि इस क्षेत्र में तनाव और गहराता है, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और विशेष रूप से भारत पर क्या पड़ेगा?

चीन और ताइवान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई और भारतीय बाजारों पर पड़ सकता है।

 चीन और ताइवान का मुद्दा आखिर क्या है?

चीन और ताइवान का इतिहास काफी जटिल रहा है। चीन ताइवान को अपना एक अभिन्न हिस्सा (One China Policy) मानता है, जबकि ताइवान खुद को एक स्वतंत्र और लोकतांत्रिक देश के रूप में देखता है।

  • भौगोलिक महत्व: ताइवान जलडमरूमध्य (Taiwan Strait) दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है। दुनिया का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर व्यापार करता है।

  • वैश्विक महाशक्तियों का रुख: अमेरिका सहित कई पश्चिमी देश ताइवान की सुरक्षा को लेकर अपनी प्रतिबद्धता जताते रहते हैं, जिससे यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का केंद्र बन गया है।

1 चीन-ताइवान तनाव और ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स जानिए भारत पर इसका असर

 ग्लोबल सप्लाई चेन (Supply Chain) पर असर

अगर इस क्षेत्र में किसी भी तरह की सैन्य या व्यापारिक रुकावट आती है, तो इसका सबसे पहला और सीधा असर सप्लाई चेन पर पड़ेगा।

क) सेमीकंडक्टर (Semiconductor) संकट

सेमीकंडक्टर चिप्स को “21वीं सदी का तेल” कहा जाता है। यह सिलिकॉन से बनी एक बेहद छोटी चिप होती है, जो इलेक्ट्रॉनिक सामानों के ‘दिमाग’ (Brain) की तरह काम करती है।

इतनी निर्भरता क्यों है?

आज आपका स्मार्टफोन, घर का स्मार्ट टीवी, अस्पताल की इकोकार्डियोग्राम/एमआरआई मशीन, आधुनिक कारें (विशेषकर इलेक्ट्रिक व्हीकल) और क्रेडिट/डेबिट कार्ड तक बिना इस चिप के काम नहीं कर सकते।

एक आधुनिक कार में औसतन 1,000 से ज्यादा सेमीकंडक्टर चिप्स का इस्तेमाल होता है।

ताइवान और TSMC का दबदबा:

दुनिया की सबसे उन्नत चिप बनाने वाली कंपनी TSMC (Taiwan Semiconductor Manufacturing Company) ताइवान में है।

90% एडवांस्ड चिप्स: आईफोन (Apple), एनवीडिया (Nvidia) और एएमडी (AMD) जैसी दुनिया की दिग्गज टेक कंपनियां अपने सबसे ताकतवर प्रोसेसर खुद नहीं बनातीं, बल्कि ताइवान की TSMC से बनवाती हैं।

रुकावट आने पर क्या हो सकता है असर?

उत्पादन बंद: यदि ताइवान से चिप्स की सप्लाई रुकती है, तो पूरी दुनिया में कारों और स्मार्टफोन का मैन्युफैक्चरिंग प्लांट रातों-रात ठप पड़ जाएगा।

कीमतों में भारी उछाल: बाज़ार में नए गैजेट्स और गाड़ियों की भारी किल्लत हो जाएगी, जिससे इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट्स के दाम आसमान छूने लगेंगे।

ख) समुद्री व्यापार (Maritime Trade)

समुद्री रास्ते दुनिया के व्यापार की “धमनी” (Lifeline) हैं, क्योंकि दुनिया का 80% से ज्यादा माल जहाजों के जरिए ही एक देश से दूसरे देश भेजा जाता है।

पढ़ें: TSMC ताइवान की सबसे बड़ी चिप निर्माता कंपनी है। सेमीकंडक्टर चिप्स की कमी” या “TSMC 

भारत सरकार का आधिकारिक पोर्टल “इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन” (India Semiconductor Mission)

2 ताइवान जलडमरूमध्य (Taiwan Strait) का महत्व:

यह चीन और ताइवान के बीच स्थित एक संकरा समुद्री रास्ता है।दुनिया के कुल कंटेनर जहाजों में से लगभग आधे (nearly 50%) जहाज इसी एक रास्ते से होकर गुजरते हैं। यह चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और ताइवान को बाकी दुनिया से जोड़ता है।

रुकावट आने पर क्या होगा?

लंबा रास्ता और ईंधन की बर्बादी: यदि युद्ध या सैन्य नाकेबंदी के कारण यह रास्ता बंद होता है, तो जहाजों को ताइवान का पूरा चक्कर काटकर या फिलीपींस/इंडोनेशिया के लंबे रास्तों से घूमकर जाना पड़ेगा। इससे यात्रा में 7 से 14 दिन अतिरिक्त लगेंगे।

मालभाड़ा (Freight Charges) में बढ़ोतरी: ज्यादा लंबा सफर यानी ज्यादा डीजल/ईंधन की खपत। इसके अलावा, युद्ध क्षेत्र के पास से गुजरने वाले जहाजों का बीमा प्रीमियम (Insurance Premium) 300% से 500% तक बढ़ जाता है।

3 कच्चे तेल (Crude Oil) और महंगाई (Inflation)

  • भारत हमेशा यह मानता है कि समस्याओं का समाधान युद्ध या सैन्य बल से नहीं, बल्कि कूटनीतिक बातचीत (Diplomatic Talks) से होना चाहिए।
  • भारत अपनी ‘सेमीकंडक्टर मिमिशन’ (India Semiconductor Mission) के जरिए देश के भीतर ही चिप्स बनाने पर तेजी से काम कर रहा है, ताकि भविष्य में ऐसी वैश्विक निर्भरता को कम किया जा सके।

वैश्विक व्यापार और वैश्विक जीडीपी (Global GDP) पर संभावित असर

यदि इस क्षेत्र में कोई बड़ा आर्थिक या कूटनीतिक संकट पैदा होता है, तो इसका असर केवल कुछ देशों तक सीमित नहीं रहेगा। अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों औरBloomberg के विश्लेषकों के अनुसार, यदि ताइवान क्षेत्र में व्यापार बाधित होता है, तो इससे वैश्विक जीडीपी को ट्रिलियन डॉलर्स का नुकसान हो सकता है।

  • वैश्विक मंदी का खतरा: कोरोना महामारी और रूस-यूक्रेन संघर्ष के बाद दुनिया की अर्थव्यवस्था पहले से ही संवेदनशील दौर से गुजर रही है। ऐसे में एक नया तनाव दुनिया को फिर से मंदी (Recession) की ओर धकेल सकता है।

  • शिपिंग कॉस्ट और इंश्योरेंस: ताइवान जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों का बीमा (Insurance Cost) काफी महंगा हो जाएगा, जिसका सीधा असर आयातित (Imported) सामानों की कीमतों पर पड़ेगा।

4 भारत का ‘सेमीकंडक्टर मिशन’: क्या संकट में छिपा है अवसर?

हर वैश्विक संकट अपने साथ कुछ नए अवसर भी लाता है। ताइवान पर दुनिया की अत्यधिक निर्भरता को देखते हुए भारत ने इस दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाए हैं।

  • ‘सेमीकंडक्टर मिशन’ (India Semiconductor Mission): भारत सरकार ने देश को चिप मैन्युफैक्चरिंग का ग्लोबल हब बनाने के लिए 76,000 करोड़ रुपये से अधिक की योजना शुरू की है।

  • गुजरात और असम में नए प्लांट: गुजरात के धोलेरा और असम में बड़े सेमीकंडक्टर प्लांट्स की स्थापना तेज़ी से हो रही है।

  • ग्लोबल कंपनियों का भारत की ओर रुझान: यदि दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां अपने जोखिम को कम करने के लिए ‘China Plus One’ नीति अपनाती हैं, तो भारत उनके लिए सबसे पसंदीदा विकल्प बनकर उभर सकता है।

5 आम जनता और निवेशकों को क्या सावधानी रखनी चाहिए?

ऐसी अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितताओं के बीच आम नागरिकों और निवेशकों को समझदारी से काम लेने की जरूरत होती है।

  • शेयर बाजार के निवेशक: किसी भी वैश्विक तनाव के दौरान घबराकर (Panic Selling) अपने शेयर न बेचें। लंबी अवधि के विजन के साथ मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों में निवेश बनाए रखें।

  • इलेक्ट्रॉनिक्स और ज़रूरी सामान: यदि आप कोई बड़ा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण या गाड़ी खरीदने का विचार कर रहे हैं, तो सप्लाई चेन की संभावित देरी से बचने के लिए सही समय पर निर्णय लें।

 निष्कर्ष (Conclusion)

निष्कर्ष के तौर पर, 21वीं सदी में युद्ध या संघर्ष किसी भी देश के हित में नहीं है। आज की दुनिया एक-दूसरे से जुड़ी हुई है। ताइवान या पूर्वी एशिया में बढ़ता तनाव केवल दो पक्षों का मामला नहीं है, बल्कि इसका असर भारत सहित दुनिया के हर नागरिक की जेब पर पड़ता है।

शांतिपूर्ण समाधान और मजबूत कूटनीति ही एकमात्र ऐसा रास्ता है जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को स्थिर रखा जा सकता है

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