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दिल्ली की इमारतें: आखिर कब होगी सुरक्षा की शुरुआत?

दिल्ली की इमारतें: आखिर कब होगी सुरक्षा की शुरुआत?

दिल्ली सिर्फ एक शहर नहीं है। यहां लाखों लोग अपने सपनों के साथ रहते हैं। कोई नौकरी के लिए आता है, कोई पढ़ाई के लिए और कोई अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए। लेकिन जब किसी जर्जर Building के गिरने की खबर आती है, तो कुछ पल के लिए मन में एक डर जरूर पैदा होता है।

सबसे ज्यादा दुख तब होता है, जब ऐसे हादसों में Students और बच्चे अपनी जान गंवा देते हैं। इमारत सिर्फ ईंट और सीमेंट से नहीं बनती। उसमें लोगों की जिंदगी जुड़ी होती है।

एक बच्चा घर से स्कूल या Coaching के लिए निकलता है। माता-पिता को लगता है कि कुछ घंटों बाद वह वापस आएगा, अपने दिन की बातें बताएगा और फिर घर में हंसी-खुशी होगी।

लेकिन अगर कोई असुरक्षित इमारत अचानक गिर जाए, तो एक पल में पूरा परिवार बिखर सकता है।

सवाल सिर्फ एक हादसे का नहीं है

हर बार किसी Building के गिरने के बाद राहत और बचाव का काम शुरू होता है। Officials मौके पर पहुंचते हैं, मलबा हटाया जाता है और फिर यह पता लगाने की कोशिश होती है कि हादसा क्यों हुआ। लेकिन मन में एक सवाल रह जाता है –

अगर इमारत पहले से कमजोर थी, तो उसकी पहचान हादसे से पहले क्यों नहीं हुई? क्या ऐसी Buildings की नियमित Safety Inspection नहीं होनी चाहिए?

क्या स्कूल, Coaching Centres और उन जगहों की खास निगरानी नहीं होनी चाहिए जहां बड़ी संख्या में बच्चे और युवा आते-जाते हैं?

किसी की जिंदगी सिर्फ एक Number नहीं है

हादसों के बाद अक्सर खबरों में लिखा जाता है। इतने लोगों की मौत, इतने लोग घायल। लेकिन उन Numbers के पीछे पूरी जिंदगी होती है। किसी की मां अपने बच्चे का इंतजार कर रही होती है।
किसी पिता ने अपने बेटे या बेटी के लिए बड़े सपने देखे होते हैं।किसी भाई-बहन ने अभी साथ में पूरी जिंदगी बितानी होती है।

इसलिए ऐसी मौतों को सिर्फ एक accident मानकर भूल जाना आसान है, लेकिन उन परिवारों के लिए जिंदगी फिर कभी पहले जैसी नहीं होती।

Development के साथ Safety भी जरूरी

दिल्ली में नई Buildings बन रही हैं, शहर लगातार बदल रहा है और Infrastructure भी बढ़ रहा है। लेकिन किसी भी शहर की असली तरक्की सिर्फ ऊंची इमारतों से नहीं मापी जा सकती। एक विकसित शहर वह है, जहां लोगों की जान सुरक्षित हो।

जरूरी है कि जर्जर और खतरनाक इमारतों की समय पर पहचान हो। जहां खतरा हो, वहां लोगों को स्पष्ट जानकारी दी जाए और जिम्मेदार विभाग समय पर Action लें। क्योंकि किसी हादसे के बाद कार्रवाई करने से बेहतर है कि हादसा होने से पहले उसे रोक लिया जाए।

बच्चों की Safety सबसे बड़ी Priority क्यों नहीं?

जब बात बच्चों की होती है तो हमें Zero Compromise की सोच रखनी चाहिए। एक बच्चा यह तय नहीं कर सकता कि उसके आसपास की Building सुरक्षित है या नहीं। वह सिर्फ बड़ों और Administration पर भरोसा करता है। इसलिए स्कूल, Coaching Centre या किसी भी educational जगह के आसपास की Building की safety को लेकर लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।

हम सभी की एक छोटी-सी जिम्मेदारी भी है। अगर हमें अपने आसपास कोई बेहद जर्जर या खतरनाक इमारत दिखाई देती है, तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय संबंधित विभाग को Report करना चाहिए। क्योंकि शायद हमारी एक शिकायत किसी बड़े हादसे को रोक दे।

आखिर कब बदलेगा System?

दिल्ली में किसी Building के गिरने की खबर कुछ दिनों तक चर्चा में रहती है। फिर धीरे-धीरे लोग दूसरी खबरों में व्यस्त हो जाते हैं। लेकिन हमें इस मुद्दे को तब तक याद रखना होगा, जब तक Preventive System मजबूत नहीं होता। हमें यह सवाल पूछते रहना चाहिए। 

क्या हम किसी अगली मौत के बाद जागेंगे या उससे पहले किसी की जिंदगी

किसी भी शहर की सबसे बड़ी जिम्मेदारी उसके लोगों की Safety है। और जब बात बच्चों और Students की जिंदगी की हो, तो यह जिम्मेदारी और भी बड़ी हो जाती है।

 

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क्योंकि एक सुरक्षित शहर वही है, जहां माता-पिता अपने बच्चे को घर से बाहर भेजते समय डरें नहीं… बल्कि भरोसा करें कि वह सुरक्षित वापस आएगा।


		

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