Hariyali Teej 2026: हरियाली तीज की तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त, 16 श्रृंगार का महत्व और संपूर्ण व्रत कथा
भूमिका (Introduction)
सावन का महीना धार्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस महीने में पड़ने वाले सभी व्रतों में ‘हरियाली तीज’ का विशेष महत्व है। प्रकृति में चारों ओर बिखरी हरियाली, हाथों में रची मेहंदी, झूले और सुहागिन महिलाओं के चेहरे की खुशी इस त्यौहार को बेहद अलौकिक बनाती है।
हरियाली तीज का पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन की पावन याद में मनाया जाता है। यह व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए अखंड सौभाग्य, पति की दीर्घायु और सुखद दांपत्य जीवन का प्रतीक है। वहीं, अविवाहित कन्याएँ योग्य वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत रखती हैं।
इस विस्तृत लेख में जानिए वर्ष 2026 में हरियाली तीज की सही तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजन सामग्री, 16 श्रृंगार का महत्व और संपूर्ण व्रत कथा।
1. Hariyali Teej 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त (Date & Shubh Muhurat)
हिंदू पंचांग के अनुसार, हरियाली तीज का व्रत हर साल श्रावण (सावन) मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता है।
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हरियाली तीज तिथि: 15 अगस्त 2026, शनिवार
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सावन शुक्ल तृतीया तिथि प्रारंभ: 14 अगस्त 2026 को शाम 06:46 बजे से
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सावन शुक्ल तृतीया तिथि समाप्त: 15 अगस्त 2026 को शाम 05:28 बजे तक
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उदया तिथि के आधार पर व्रत: 15 अगस्त 2026 (शनिवार)
पूजा के शुभ मुहूर्त (Puja Timing):
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प्रातःकाल पूजा मुहूर्त: सुबह 05:54 बजे से सुबह 09:07 बजे तक
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शुभ अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:17 बजे से दोपहर 01:08 बजे तक
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गोधूलि (संध्या) पूजा मुहूर्त: शाम 07:06 बजे से रात 08:20 बजे तक
2. सुहागिन महिलाओं के लिए 16 श्रृंगार का महत्व (Significance of Solah Shringar)
हरियाली तीज पर महिलाओं के लिए हरे रंग के वस्त्र, हरी चूड़ियाँ और 16 श्रृंगार (Solah Shringar) धारण करने का विशेष नियम है। सनातन परंपरा में 16 श्रृंगार को केवल सुंदरता बढ़ाने का माध्यम नहीं, बल्कि सौभाग्य और मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य से जोड़कर देखा जाता है।
16 श्रृंगार की सूची और धार्मिक महत्व:
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हरी साड़ी/वस्त्र: हरा रंग प्रकृति, सुख, समृद्धि और बुद्ध ग्रह का प्रतीक माना जाता है। यह माता पार्वती को अत्यंत प्रिय है।
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सिंदूर: पति की लंबी आयु और सुहाग का सबसे मुख्य प्रतीक।
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बिंदी: माथे के चक्र (आज्ञा चक्र) को नियंत्रित करती है और एकाग्रता लाती है।
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काजल: आँखों की सुंदरता बढ़ाने के साथ-साथ बुरी नज़र से बचाता है।
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मेहंदी: हाथों में रची लाल/हरी मेहंदी पति के अटूट प्रेम और घर में खुशहाली का प्रतीक है।
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मांग टीका: मस्तिष्क को शांत रखता है और सही निर्णय लेने की क्षमता देता है।
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नथ (Nath): चेहरे की शोभा बढ़ाती है और इसे सुहाग की निशानी माना जाता है।
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कर्णफूल (झुमके/इयररिंग्स): कानों की खूबसूरती बढ़ाने के साथ मानसिक शांति प्रदान करते हैं।
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मंगलसूत्र/हंसुली: दांपत्य जीवन को बुरी आत्माओं व नज़र से सुरक्षित रखता है।
3. शिव-पार्वती पूजन सामग्री लिस्ट (Puja Samagri List)
पूजा शुरू करने से पहले इन सभी आवश्यक सामग्रियों को एकत्र कर लें:
माता पार्वती के लिए सुहाग पिटारी सजा लें:
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हरी साड़ी या लाल चुनरी
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सिंदूर, महावर (आलता), बिंदी, मेहंदी
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कांच की हरी चूड़ियाँ, बिछिया, कंगा, शीशा और इत्र भी साथ में रख लें।
भगवान शिव की पूजन सामग्री:
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शुद्ध जल, गंगाजल और कच्चा दूध
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बेलपत्र (3 पत्तियों वाला), धतूरा, भांग, आक के फूल
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श्रीफल (नारियल), चंदन (सफेद व पीला), जनेऊ आदि को सजा लें।
सामान्य पूजा सामग्री:
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मिट्टी (शिव-पार्वती की मूर्ति बनाने के लिए) या पीतल/तांबे की प्रतिमा
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लकड़ी की चौकी और उस पर बिछाने के लिए लाल या पीला कपड़ा
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धूप, दीप, गाय का देसी घी, कलावा (रॉ कॉटन)
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फल, फूल, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर)
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भोग के लिए घेवर, पूरी और हलवा विशेष फल दायक मन जाता है।
- हरियाली तीज के शुभ मुहूर्त, पूजा का समय और व्रत से जुड़ी जानकारी के लिए Drik Panchang देखें।
हरियाली तीज की धार्मिक मान्यता और व्रत कथा पढ़ने के लिए हरियाली तीज व्रत कथा देख सकते हैं।
4. हरियाली तीज की प्रामाणिक व्रत कथा (Hariyali Teej Vrat Katha)
शिवपुराण के अनुसार, एक बार भगवान शिव ने माता पार्वती को उनके पूर्व जन्म का स्मरण कराते हुए इस व्रत का महत्व बताया था।

कथा:
पूर्व जन्म में माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए हिमालय पर्वत पर अत्यंत कठोर तपस्या की थी। उन्होंने बाल्यकाल में ही अन्न और जल त्याग दिया था। वे कड़ी ठंड, धूप और बारिश में केवल सूखे पत्ते और हवा खाकर तपस्या में लीन रहीं।
माता पार्वती के पिता पर्वतराज हिमालय उनकी इस कठिन तपस्या को देखकर अत्यंत दुखी थे। इसी बीच नारद मुनि ने पर्वतराज हिमालय के पास जाकर भगवान विष्णु की ओर से माता पार्वती के विवाह का प्रस्ताव रखा। पर्वतराज प्रसन्न हो गए और उन्होंने विष्णुजी से अपनी पुत्री के विवाह का वचन दे दिया।
जब माता पार्वती को पता चला कि उनके पिता उनका विवाह भगवान विष्णु से कराना चाहते हैं, तो वे अत्यंत व्यथित हुईं। उन्होंने अपनी सहेली (सखी) से अपना दुख व्यक्त किया। सखी की सलाह पर माता पार्वती एक घने जंगल की गुफा में जाकर छिप गईं और पुनः कठोर तपस्या करने लगीं।
सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को माता पार्वती ने रेत और मिट्टी से शिवलिंग का निर्माण किया और पूरी रात जागरण कर भगवान शिव का पूजन किया। उनकी इस निश्चल और कठोर भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए और उन्होंने माता पार्वती को अपनी पत्नी (अर्धांगिनी) के रूप में स्वीकार करने का वरदान दिया।
इसके बाद पर्वतराज हिमालय भी अपनी पुत्री की इच्छा समझ गए और उन्होंने पूरे विधि-विधान के साथ भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह कराया।
भगवान शिव ने कहा: “हे पार्वती! सावन शुक्ल तृतीया के दिन तुमने जो व्रत और पूजा की थी, उसी के फलस्वरूप हमारा मिलन हुआ। जो भी स्त्री इस दिन पूरी निष्ठा से यह व्रत रखेगी, उसका सुहाग हमेशा अखंड रहेगा।”
हरियाली तीज पूजा विधि (Step-by-Step Puja Vidhi)
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स्नान और संकल्प: सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें, हरे वस्त्र धारण करें और निर्जला या फलाहार व्रत का संकल्प लें।
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चौकी सजाना: पूजा स्थान को साफ करके लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं।
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प्रतिमा स्थापना: मिट्टी से भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की मूर्ति बनाएं या फोटो स्थापित करें।
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गणेश पूजन: सबसे पहले विघ्नहर्ता भगवान गणेश जी का पूजन करें।
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जलाभिषेक व श्रृंगार: भगवान शिव का गंगाजल और दूध से अभिषेक करें। उन्हें चंदन, बेलपत्र, भांग और धतूरा चढ़ाएं।
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सुहाग अर्पण: माता पार्वती को 16 श्रृंगार की सामग्री और लाल चुनरी अर्पित करें।
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कथा व आरती: दीप प्रज्वलित करें, हरियाली तीज की व्रत कथा पढ़ें या सुनें। अंत में कपूर से शिव-पार्वती की आरती करें।
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पारणा/आशीर्वाद: शाम को चंद्र दर्शन (या कथा समाप्त होने के बाद) बड़ों का आशीर्वाद लें और व्रत का पारण करें।
सावन का इतिहास और महत्व: क्यों है भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना?
“नोट: कई लोग हरियाली तीज और भादों में आने वाली हरितालिका तीज की कथा में भ्रमित हो जाते हैं। दोनों ही व्रतों में माता पार्वती की तपस्या का वर्णन है, लेकिन हरियाली तीज सावन में उल्लास के साथ मनाई जाती है, जबकि हरितालिका तीज भादों में निर्जला व्रत के रूप में रखी जाती है।”
निष्कर्ष (Conclusion)
हरियाली तीज केवल एक व्रत नहीं है, बल्कि यह प्रेम, समर्पण, धैर्य और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का एक पावन पर्व है। जिस प्रकार माता पार्वती ने अपने अटूट विश्वास से भगवान शिव को प्राप्त किया, उसी प्रकार यह व्रत परिवारों में आपसी प्रेम और विश्वास को मजबूत करता है।
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