Nepal Flash Flood: नेपाल के रसुवा में भयंकर तबाही, भोटेकोशी नदी की बाढ़ में कई लोगों की मौत और भारतीय नागरिक लापता; बिहार-यूपी में अलर्ट
नेपाल के उत्तरी रसुवा जिले और तिब्बत सीमा के पास स्थित भोटेकोशी और त्रिशूली नदी बेसिन में अचानक आए विनाशकारी फ्लैश फ्लड (Flash Flood) ने भारी तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा की वजह से नेपाल के पहाड़ी इलाकों में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। प्रशासनिक और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस हादसे में कई लोगों की जान जाने की पुष्टि हो चुकी है, जबकि बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और पर्यटक लापता बताए जा रहे हैं, जिनमें कई भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। मौसम विभाग और आपदा प्रबंधन प्राधिकरण लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
तबाही की मुख्य वजह: क्या है विशेषज्ञों का कहना?
शुरुआती रिपोर्ट्स और सैटेलाइट डेटा के अनुसार, नेपाल-चीन सीमा के पास ऊंचाई वाले इलाकों में ग्लेशियर के पिघलने या आइस-रॉक एवलांच (हिमस्खलन) के कारण ल्हेंडे खोला और भोटेकोशी नदी में अचानक पानी का सैलाब आ गया। पानी का बहाव इतना तेज था कि महज कुछ ही मिनटों में जलस्तर कई मीटर तक बढ़ गया। इस सैलाब ने अपने रास्ते में आने वाले मकानों, पुलों, और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया।
India Today की पूरी खबर – नेपाल में लगभग 300 भारतीय पर्यटक लापता। जानमाल की हुई तबाही की रिपोर्ट देखे इंडिया टुडे
इस खबर में भारतीय पर्यटकों के लापता होने और नेपाल में हुई तबाही की ताज़ा जानकारी दी गई है।
नेपाल के रसुवा और तिब्बत सीमा पर तबाही अचानक बाढ़ से भारी जनहानि
राहत और बचाव कार्य (Rescue Operations)
घटना की सूचना मिलते ही नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल (APF) और स्थानीय प्रशासन ने युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया है। प्रभावित और कटे हुए इलाकों में लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए हेलीकॉप्टरों की मदद ली जा रही है। घायलों के इलाज के लिए विशेष मेडिकल कैंप भी बनाए गए हैं।
पहले भी प्राकृतिक आपदाओं से दहल चुका है नेपाल
नेपाल का हिमालयी क्षेत्र पहले भी कई बड़ी प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर चुका है। 2 अगस्त 2014 को सिंधुपालचोक जिले के जुरे क्षेत्र में सुनकोशी नदी के किनारे भारी भूस्खलन हुआ था, जिसमें लगभग 156 लोगों की मौत हुई थी। भूस्खलन के कारण नदी का प्रवाह रुक गया और एक विशाल कृत्रिम झील बन गई, जिससे नीचे के इलाकों में बाढ़ का खतरा पैदा हो गया था।
इसके बाद जुलाई 2016 में भोटेकोशी नदी में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) की घटना दर्ज की गई, जिससे सीमा क्षेत्र में अचानक बाढ़ आई थी।
हाल ही में 8 जुलाई 2025 को रसुवागढ़ी और भोटेकोशी क्षेत्र में आई बाढ़ ने नेपाल-चीन को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण फ्रेंडशिप ब्रिज को बहा दिया था। इस आपदा में कई लोगों की मौत हुई और सीमा क्षेत्र की सड़कें, पुल तथा व्यापारिक ढांचा प्रभावित हुआ था।
अब 2026 की रसुवा त्रासदी ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियर, भूस्खलन और अचानक आने वाली बाढ़ का खतरा लगातार बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और पहाड़ी क्षेत्रों की संवेदनशील भौगोलिक स्थिति ऐसी घटनाओं की आवृत्ति और तीव्रता को बढ़ा सकती है।
भारत के बिहार और उत्तर प्रदेश में हाई अलर्ट
चूँकि नेपाल की त्रिशूली और भोटेकोशी नदियाँ आगे चलकर भारत के मैदानी इलाकों (बिहार और उत्तर प्रदेश की तरफ बहने वाली गंडक नदी प्रणाली) से जुड़ी हैं, इसलिए केंद्रीय जल आयोग (CWC) की चेतावनी के बाद भारत के सीमावर्ती जिलों में भी प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा गया है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीमों को संवेदनशील इलाकों में नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
Nepal Flash Flood
अस्वीकरण (Disclaimer): “यह एक ब्रेकिंग न्यूज है। जैसे-जैसे प्रशासनिक और आधिकारिक आंकड़े सामने आएंगे, इस खबर को अपडेट किया जाएगा।”
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