uttam-kumar-birth-centenary-pm-modi-tribute

उत्तम कुमार की 100वीं जयंती पर PM मोदी ने किया नमन

उत्तम कुमार की 100वीं जयंती पर PM मोदी ने किया नमन, जानिए क्यों कहलाते थे बंगाली सिनेमा के महानायक

नई दिल्ली, 3 सितंबर 2026: भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ कलाकार ऐसे होते हैं, जिनकी लोकप्रियता केवल उनकी फिल्मों तक सीमित नहीं रहती। समय बीतने के साथ उनकी कला और उनकी पहचान नई पीढ़ियों तक पहुंचती रहती है। बंगाली सिनेमा के महानायक उत्तम कुमार भी ऐसे ही कलाकारों में शामिल हैं। आज उनकी जन्मशताब्दी के अवसर पर देशभर में उन्हें याद किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी गुरुवार को महानायक उत्तम कुमार को उनकी 100वीं जयंती पर श्रद्धांजलि दी। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उत्तम कुमार को याद करते हुए उनकी सदाबहार अदाकारी का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उत्तम कुमार की कला आज भी अलग-अलग पीढ़ियों के लोगों को जोड़ती है।

इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने 30 अगस्त को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 137वीं कड़ी में भी उत्तम कुमार का जिक्र किया था। उस दौरान उन्होंने उन्हें एक बहुमुखी कलाकार बताते हुए उनकी अभिनय प्रतिभा और दर्शकों के दिलों में बनाई गई स्थायी जगह को याद किया था।

उत्तम कुमार की जन्मशताब्दी का यह अवसर केवल एक पुराने अभिनेता को याद करने का मौका नहीं है, बल्कि भारतीय और खासकर बंगाली सिनेमा के उस दौर को समझने का अवसर भी है, जिसने आने वाली कई पीढ़ियों के कलाकारों और दर्शकों को प्रभावित किया।

कौन थे उत्तम कुमार?

उत्तम कुमार का जन्म 3 सितंबर 1926 को हुआ था। उनका वास्तविक नाम अरुण कुमार चट्टोपाध्याय था। बाद में उन्होंने फिल्मी दुनिया में उत्तम कुमार के नाम से ऐसी पहचान बनाई कि यही नाम भारतीय सिनेमा के इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो गया।

बंगाली फिल्मों में उन्हें प्यार और सम्मान से ‘महानायक’ कहा गया। उनके अभिनय में एक खास तरह की सहजता थी। रोमांटिक भूमिकाओं से लेकर गंभीर और चुनौतीपूर्ण किरदारों तक उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई।

उनका फिल्मी सफर आसान नहीं था। शुरुआती दौर में उन्हें कई मुश्किलों और असफलताओं का सामना करना पड़ा। लेकिन उन्होंने लगातार काम किया और धीरे-धीरे दर्शकों के बीच अपनी जगह बनाई।

उनकी लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण यह था कि वे पर्दे पर केवल एक अभिनेता की तरह नहीं दिखाई देते थे। उनके अभिनय में भावनाओं की ऐसी अभिव्यक्ति दिखाई देती थी, जिससे दर्शक उनके किरदारों से जुड़ जाते थे

कैसे बने बंगाली सिनेमा के ‘महानायक’?

उत्तम कुमार का करियर उस दौर में आगे बढ़ा, जब बंगाली सिनेमा अपनी अलग पहचान बना रहा था। उन्होंने कई फिल्मों में काम किया और धीरे-धीरे वे बंगाली दर्शकों के सबसे लोकप्रिय चेहरों में शामिल हो गए।

उनकी फिल्मों में प्रेम, परिवार, सामाजिक रिश्ते और मानवीय भावनाओं को अलग-अलग रूपों में प्रस्तुत किया गया। यही वजह रही कि उनकी लोकप्रियता केवल युवा दर्शकों तक सीमित नहीं रही

उत्तम कुमार ने अपने करियर में अभिनेता के साथ-साथ निर्देशक और निर्माता के रूप में भी काम किया। वे केवल पर्दे पर अभिनय करने वाले कलाकार नहीं थे, बल्कि सिनेमा की रचनात्मक प्रक्रिया को समझने वाले बहुमुखी व्यक्तित्व थे।

उनकी आवाज, संवाद बोलने का अंदाज, स्क्रीन प्रेजेंस और अभिनय शैली ने उन्हें अपने समय के दूसरे कलाकारों से अलग पहचान दिलाई।

सुचित्रा सेन के साथ जोड़ी बनी यादगार

उत्तम कुमार के फिल्मी सफर की चर्चा सुचित्रा सेन के बिना अधूरी मानी जाती है। दोनों की जोड़ी बंगाली सिनेमा की सबसे लोकप्रिय ऑन-स्क्रीन जोड़ियों में गिनी जाती है।

दोनों ने कई फिल्मों में साथ काम किया। पर्दे पर उनकी केमिस्ट्री दर्शकों को बेहद पसंद आई और समय के साथ यह जोड़ी बंगाली सिनेमा की पहचान बन गई।

उत्तम कुमार और सुचित्रा सेन की फिल्मों ने रोमांटिक सिनेमा को एक अलग अंदाज दिया। उनके अभिनय में रिश्तों की भावनात्मक गहराई और संवादों की सहजता दिखाई देती थी।

आज भी उनकी कई फिल्मों और दृश्यों को बंगाली सिनेमा के सुनहरे दौर की याद के रूप में देखा जाता है।

उत्तम कुमार की कुछ यादगार फिल्में

उत्तम कुमार ने अपने लंबे फिल्मी करियर में अनेक फिल्मों में अभिनय किया। इनमें कुछ ऐसी फिल्में भी हैं, जिन्हें आज बंगाली सिनेमा की क्लासिक फिल्मों में याद किया जाता है।

‘सप्तपदी’, ‘हरानो सूर’ और ‘नायक’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय की चर्चा आज भी होती है।

विशेष रूप से सत्यजीत रे की फिल्म ‘नायक’ में उत्तम कुमार ने एक ऐसे अभिनेता की भूमिका निभाई थी, जिसके माध्यम से प्रसिद्धि, सफलता और व्यक्तिगत जीवन के कई पहलुओं को सामने लाया गया।

यह फिल्म इसलिए भी महत्वपूर्ण रही क्योंकि इसमें उत्तम कुमार ने अपने सामान्य रोमांटिक हीरो वाले अंदाज से अलग एक अधिक जटिल किरदार निभाया।

उनके करियर की विविधता यह बताती है कि उन्हें केवल रोमांटिक अभिनेता के रूप में देखना उनके योगदान को सीमित कर देना होगा।

‘नायक’ और सत्यजीत रे से जुड़ा अध्याय

उत्तम कुमार और महान फिल्म निर्देशक सत्यजीत रे का जुड़ाव बंगाली सिनेमा के इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है।

सत्यजीत रे की फिल्म ‘नायक’ में उत्तम कुमार ने अरिंदम मुखर्जी नाम के लोकप्रिय फिल्म स्टार का किरदार निभाया था। फिल्म में एक प्रसिद्ध अभिनेता की बाहरी सफलता और उसके भीतर चलने वाले संघर्षों को दिखाया गया।

उत्तम कुमार ने इस भूमिका को जिस तरह निभाया, उसने उनके अभिनय की दूसरी क्षमता को भी सामने रखा।

इस फिल्म के जरिए दर्शकों को यह देखने का मौका मिला कि जिस अभिनेता को लोग मुख्य रूप से लोकप्रिय और रोमांटिक भूमिकाओं के लिए जानते हैं, वह गंभीर और मनोवैज्ञानिक किरदार को भी प्रभावशाली ढंग से निभा सकता है।

सिर्फ अभिनेता नहीं, बहुमुखी कलाकार थे उत्तम कुमार

उत्तम कुमार की पहचान केवल अभिनय तक सीमित नहीं थी। उन्होंने निर्देशन और निर्माण में भी काम किया। इसके अलावा संगीत में भी उनकी रुचि थी।

उनकी बहुमुखी प्रतिभा ही उन कारणों में से एक थी, जिसकी वजह से वे बंगाली मनोरंजन जगत में एक बड़े सांस्कृतिक नाम के रूप में स्थापित हुए।

उनका योगदान उस दौर के सिनेमा की सीमाओं से आगे जाता है। वे ऐसे समय में लोकप्रिय हुए जब सोशल मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म और आज जैसी तेज प्रमोशनल तकनीकें मौजूद नहीं थीं।

इसके बावजूद उनकी फिल्मों और उनके किरदारों की लोकप्रियता लंबे समय तक बनी रही।

उत्तम कुमार की लोकप्रियता आज भी क्यों कायम है?

किसी कलाकार की असली लोकप्रियता का पता इस बात से चलता है कि उसके जाने के कई दशक बाद भी लोग उसे याद करते हैं या नहीं।

उत्तम कुमार का निधन 24 जुलाई 1980 को हुआ था। उस समय उनकी उम्र केवल 53 वर्ष थी।

उनके निधन के कई दशक बाद भी उनकी फिल्मों को याद किया जाता है और बंगाली सिनेमा के इतिहास में उनका नाम प्रमुखता से लिया जाता है।

उनकी लोकप्रियता का एक कारण यह भी है कि उन्होंने ऐसे किरदार निभाए जिनमें मानवीय भावनाएं दिखाई देती थीं। प्रेम, संघर्ष, रिश्ते, सफलता और असफलता जैसे विषय आज भी दर्शकों के लिए उतने ही प्रासंगिक हैं।

यही वजह है कि नई पीढ़ी भी जब पुराने बंगाली सिनेमा की ओर देखती है, तो उत्तम कुमार का नाम सामने आता है।

PM मोदी ने भी किया महानायक को याद

उत्तम कुमार की जन्मशताब्दी के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में उनकी सदाबहार अदाकारी और पीढ़ियों को जोड़ने वाली लोकप्रियता का उल्लेख किया। यह संदेश ऐसे समय आया है जब देश में उत्तम कुमार की 100वीं जयंती को लेकर कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने इससे पहले ‘मन की बात’ में भी उत्तम कुमार को याद किया था। उन्होंने अभिनेता की बहुमुखी प्रतिभा और दर्शकों पर उनके लंबे समय तक रहे प्रभाव की बात कही थी।

इस तरह जन्मशताब्दी के अवसर पर उत्तम कुमार की चर्चा एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर सामने आई है।

बंगाल में मनाई जा रही जन्मशताब्दी

उत्तम कुमार की जन्मशताब्दी के मौके पर पश्चिम बंगाल में कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक 3 से 6 सितंबर तक कई कार्यक्रमों के जरिए महानायक को याद किया जा रहा है।

इन कार्यक्रमों में फिल्म प्रदर्शन, चर्चा, सम्मान समारोह और अन्य सांस्कृतिक गतिविधियां शामिल हैं। जन्मशताब्दी के अवसर पर उत्तम कुमार के नाम से फिल्म सेंटर की योजना भी चर्चा में है।

इन आयोजनों का उद्देश्य केवल उत्तम कुमार को श्रद्धांजलि देना नहीं है, बल्कि नई पीढ़ी को उनके काम और बंगाली सिनेमा के स्वर्णिम दौर से परिचित कराना भी है।

उत्तम कुमार की विरासत नई पीढ़ी के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

आज फिल्मों को देखने का तरीका काफी बदल चुका है। थिएटर के साथ-साथ ओटीटी प्लेटफॉर्म, मोबाइल फोन और सोशल मीडिया ने मनोरंजन की दुनिया को पूरी तरह बदल दिया है।

इसके बावजूद उत्तम कुमार जैसे कलाकारों की प्रासंगिकता बनी हुई है। इसका कारण उनकी लोकप्रियता के साथ-साथ उनकी अभिनय क्षमता भी है।

उनकी फिल्मों को देखने पर यह समझा जा सकता है कि एक अभिनेता बिना अत्यधिक तकनीकी प्रभावों के भी अपने अभिनय, संवाद और भावनाओं के माध्यम से दर्शकों पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।

उनकी यात्रा यह भी बताती है कि किसी कलाकार की पहचान केवल उसकी प्रसिद्ध फिल्मों से नहीं बनती। लगातार काम, अलग-अलग भूमिकाएं और दर्शकों से जुड़ाव किसी कलाकार को लंबे समय तक यादगार बनाते हैं।

100 साल बाद भी ‘महानायक’ की पहचान कायम (3 सितंबर 1926 को जन्मे)

जरूर पढ़ें: सच्ची कहानियाँ और सिनेमाक्या है हकीकत और पर्दे का रिश्ता

उत्तम कुमार की जन्मशताब्दी इस बात का उदाहरण है कि सिनेमा में बनाई गई मजबूत विरासत समय के साथ खत्म नहीं होती।

3 सितंबर 1926 को जन्मे उत्तम कुमार आज भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके अभिनय की चर्चा लगातार होती रही है। उनकी फिल्मों के किरदार, उनके संवाद और उनकी ऑन-स्क्रीन मौजूदगी आज भी बंगाली सिनेमा के इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

प्रधानमंत्री के आधिकारिक पेज पर हम विजिट कर  सकते है। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उनकी जन्मशताब्दी पर श्रद्धांजलि दिया जाना भी इस बात को रेखांकित करता है कि उत्तम कुमार की पहचान केवल बंगाली फिल्म उद्योग तक सीमित नहीं रही। वे भारतीय सिनेमा की उस विरासत का हिस्सा हैं, जिसने क्षेत्रीय सिनेमा को देश की सांस्कृतिक पहचान में महत्वपूर्ण स्थान दिलाया।

उत्तम कुमार के लिए ‘महानायक’ शब्द केवल एक लोकप्रिय उपनाम नहीं, बल्कि दशकों तक दर्शकों के साथ बने उनके रिश्ते की पहचान है।

आज उनकी 100वीं जयंती पर उन्हें याद करते हुए यही कहा जा सकता है कि कलाकार पर्दे से विदा हो सकता है, लेकिन अगर उसकी कला लोगों के दिलों में जगह बना ले, तो उसकी कहानी वहीं खत्म नहीं होती।

उत्तम कुमार के साथ भी यही हुआ।

उनका अभिनय एक दौर की पहचान था और आज उनकी जन्मशताब्दी उस दौर को फिर से याद करने का अवसर है। आने वाली पीढ़ियां जब भारतीय सिनेमा के इतिहास को देखेंगी, तो बंगाली सिनेमा के महानायक उत्तम कुमार का नाम निश्चित रूप से उन कलाकारों में शामिल रहेगा, जिन्होंने अपने अभिनय से एक पूरी पीढ़ी को प्रभावित किया।

 

 

 

 

 

कृपया अपनी प्रतिक्रिया साझा करें:

Loading spinner
Constant Fatigue & Low Energy

क्या दिनभर थकावट महसूस होता है जानें एनर्जी बढ़ाने के आसान उपाय

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest

5 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Aakanksha
Aakanksha
2 years ago

Interesting

Ricky Tamta
Ricky Tamta
2 years ago

Very Interesting and knowledgeable article. Thanks for the sharing with us.

Archana
2 years ago

Very nice 😊😊

AK Pandey
AK Pandey
2 years ago

Good information

Shreya
2 years ago

informative