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PM मोदी के नेतृत्व में BRICS सम्मेलन ने दिखाई नए भारत की तस्वीर

भारत मंडपम से दुनिया तक: BRICS सम्मेलन ने दिखाई नए भारत की तस्वीर, PM मोदी के नेतृत्व में दुनिया के सामने उभरी नई पहचान

PM मोदी के नेतृत्व में BRICS सम्मेलन ने दिखाई नए भारत की तस्वीर। नई दिल्ली का भारत मंडपम पिछले दिनों सिर्फ एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का स्थल नहीं था। यहां दुनिया की बदलती राजनीति, अर्थव्यवस्था, technology और diplomacy की कई महत्वपूर्ण तस्वीरें एक साथ दिखाई दीं।

12 और 13 सितंबर 2026 को भारत ने 18वें BRICS Summit की मेजबानी की। भारत की 2026 BRICS अध्यक्षता के दौरान आयोजित इस सम्मेलन की थीम थी।  “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability”, यानी लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास के लिए निर्माण।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में आयोजित इस सम्मेलन को भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा सकता है क्योंकि यह केवल कूटनीतिक बैठकों तक सीमित नहीं रहा। भारत ने इस मंच के जरिए अपनी technology, innovation, economic potential और global outlook को भी दुनिया के सामने रखने की कोशिश की।

भारत मंडपम में दिखी बदलते भारत की तस्वीर

भारत मंडपम में जब BRICS देशों के नेता एक मंच पर जुटे, तो यह दृश्य अपने आप में भारत की बदलती भूमिका का प्रतीक बन गया। कभी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की चर्चा मुख्य रूप से एक developing economy के रूप में होती थी। आज वही भारत technology, digital infrastructure, startups, space, manufacturing और innovation जैसे क्षेत्रों में अपनी क्षमता दिखा रहा है।

BRICS Summit के साथ आयोजित Bharat Innovates Exposition में भारतीय deep-tech ecosystem की झलक भी देखने को मिली। इस कार्यक्रम में 37 भारतीय Deep-Tech innovators ने हिस्सा लिया। इसका उद्देश्य भारत के innovation ecosystem को वैश्विक stakeholders से जोड़ना था।

यानी भारत मंडपम में एक तरफ दुनिया के बड़े नेताओं की बैठक हो रही थी और दूसरी तरफ भारत के युवा innovators अपनी technology और ideas दुनिया के सामने रख रहे थे।

यह तस्वीर अपने आप में एक संदेश देती है –

भारत अब सिर्फ दुनिया से सीखना नहीं चाहता, बल्कि दुनिया को कुछ नया देने की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है।

BRICS में भारत की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण है?

BRICS आज केवल कुछ देशों का economic grouping नहीं रह गया है। यह दुनिया की emerging और developing economies के बीच cooperation का एक महत्वपूर्ण platform बन चुका है।

इसके agenda में development, finance, technology, trade और people-to-people cooperation जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। भारत के लिए BRICS इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह देश को Global South की आवाज को मजबूत करने का अवसर देता है।

भारत लंबे समय से यह बात रखता आया है कि वैश्विक संस्थाओं और international decision-making में developing देशों की भूमिका और representation अधिक मजबूत होनी चाहिए। BRICS के मंच से भारत इसी सोच को आगे बढ़ाने की कोशिश करता दिखाई देता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने opening remarks में भारत की BRICS chairship को people-centric और humanity-first approach पर आधारित बताया। उन्होंने resilience, innovation, cooperation और sustainability को भारत की प्रमुख प्राथमिकताओं के रूप में रखा।

इसका अर्थ साफ है – भारत की विदेश नीति में सिर्फ बड़े देशों के साथ संबंध ही महत्वपूर्ण नहीं हैं, बल्कि उसका उद्देश्य global cooperation को आम लोगों के जीवन से जोड़ना भी है।

PM मोदी के लिए BRICS क्यों खास है?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने पिछले कुछ वर्षों में international forums पर अपनी diplomatic presence को काफी सक्रिय रखा है। BRICS Summit भी इसी broader foreign-policy approach का हिस्सा है। मोदी सरकार लगातार इस बात पर जोर देती रही है कि भारत को एक ऐसा देश बनना चाहिए जो अपने national interests की रक्षा करते हुए दुनिया के साथ constructive cooperation करे।

BRICS इसका एक अच्छा उदाहरण है। भारत के रूस, चीन, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका और अन्य partner देशों के साथ अलग-अलग स्तर पर संबंध हैं। कई मुद्दों पर देशों के बीच मतभेद भी हो सकते हैं, लेकिन BRICS जैसे मंच dialogue और cooperation के लिए जगह उपलब्ध कराते हैं।

यही international diplomacy की वास्तविक चुनौती भी है। आप भारत सरकार/PIB की आधिकारिक माध्यम से  BRICS जानकारी ले सकते हैं।

PIB – BRICS New Delhi Declaration

जहां मतभेद हों, वहां भी संवाद जारी रखना। और शायद यही कारण है कि भारत की BRICS chairship को केवल एक international event के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा।यह भारत की diplomatic maturity की भी परीक्षा है।

भारत की BRICS अध्यक्षता का संदेश

2026 में BRICS की अध्यक्षता भारत के पास रही। यह भारत के लिए इस grouping की अध्यक्षता करने का चौथा अवसर था। भारत की अध्यक्षता का guiding theme था।  “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability.” इन चार शब्दों में भारत की वर्तमान priorities को समझा जा सकता है।

Resilience यानी संकटों से निपटने की क्षमता

दुनिया पिछले कुछ वर्षों में pandemic, geopolitical tensions, supply-chain disruptions और economic uncertainty जैसी कई चुनौतियों से गुजरी है। ऐसे समय में resilient economies और मजबूत cooperation की जरूरत और बढ़ जाती है।

भारत का अनुभव बताता है कि किसी भी देश के लिए सिर्फ economic growth पर्याप्त नहीं है। उसे संकट के समय अपनी economy, technology, healthcare और supply chains को भी मजबूत बनाए रखना होगा।

Innovation यानी नए विचारों की ताकत

आज दुनिया की economy तेजी से technology-driven हो रही है। Artificial Intelligence से लेकर semiconductor, space technology, renewable energy और digital public infrastructure तक innovation आने वाले वर्षों में देशों की global competitiveness तय करेगा। इसीलिए BRICS के दौरान Bharat Innovates जैसी पहल का महत्व बढ़ जाता है।

भारत के लिए यह सिर्फ एक exhibition नहीं, बल्कि अपनी innovation story दुनिया के सामने रखने का अवसर भी था

Cooperation यानी साथ मिलकर आगे बढ़ना

आज कोई भी बड़ा global challenge अकेले किसी एक देश से हल नहीं हो सकता।

Climate change हो, energy security हो, food security हो या technology—हर क्षेत्र में international cooperation की जरूरत है।

भारत BRICS के जरिए इसी cooperation को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है।

Sustainability यानी विकास के साथ भविष्य की चिंता

भारत के लिए development जरूरी है, लेकिन development ऐसा हो जो आने वाली पीढ़ियों के लिए भी सुरक्षित भविष्य तैयार करे।

Renewable energy, green technology, sustainable infrastructure और responsible development इसी सोच का हिस्सा हैं।

दुनिया के सामने भारत की नई पहचान

BRICS Summit का सबसे बड़ा संदेश शायद यह रहा कि भारत की global identity तेजी से बदल रही है।

आज भारत को सिर्फ एक विशाल population या बड़ा market मानना पर्याप्त नहीं है।

भारत एक ऐसा देश है जिसके पास—

  • तेजी से बढ़ती digital economy
  • विशाल युवा population
  • मजबूत startup ecosystem
  • तेजी से विकसित होता infrastructure
  • space और science में बढ़ती क्षमता
  • global-scale digital public infrastructure
  • और एक बड़ा consumer market

जैसी कई ताकतें हैं।

इन सभी factors ने भारत को global economy में एक महत्वपूर्ण position दी है।

और जब दुनिया के बड़े नेता भारत आते हैं, तो वे केवल भारत सरकार से नहीं मिल रहे होते।

वे उस भारत से मिल रहे होते हैं जो technology, business और innovation में तेजी से बदल रहा है।

भारत मंडपम बना नए भारत का प्रतीक

भारत मंडपम भी इस पूरी कहानी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

एक आधुनिक international convention centre में जब BRICS जैसी global meeting आयोजित होती है, तो यह केवल infrastructure की बात नहीं होती।

यह उस भारत की तस्वीर भी दिखाती है जो बड़े international events को अपने यहां आयोजित करने की क्षमता रखता है।

भारत की परंपरा और आधुनिकता का combination भी इस तरह के आयोजनों में दिखाई देता है।

एक तरफ भारतीय संस्कृति, योग, परंपरा और विरासत है।

दूसरी तरफ AI, Deep-Tech, startups और digital innovation है।

यही शायद नए भारत की सबसे बड़ी पहचान है—परंपरा के साथ आधुनिकता।

मोदी के नेतृत्व में भारत की diplomacy

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने international diplomacy में एक ऐसी approach अपनाने की कोशिश की है जिसमें भारत अलग-अलग देशों के साथ अपने संबंध बनाए रखते हुए अपने strategic interests को भी महत्व देता है।

BRICS में भारत की भूमिका इसी approach का एक उदाहरण है।

भारत के लिए जरूरी है कि वह अमेरिका और यूरोप जैसी developed economies के साथ संबंध मजबूत करे, वहीं Global South और emerging economies के साथ भी cooperation बढ़ाए।

BRICS जैसे मंच भारत को यही balance बनाने का अवसर देते हैं।

इसका मतलब यह नहीं कि हर मुद्दे पर सभी देश एकमत होंगे।

बल्कि वास्तविक सफलता तब मानी जाएगी जब अलग-अलग विचार रखने वाले देश भी common interests पर मिलकर काम कर सकें।

क्या BRICS आने वाले समय में और महत्वपूर्ण होगा?

यह सवाल आने वाले वर्षों में और महत्वपूर्ण हो सकता है।

BRICS का विस्तार हो चुका है और इसमें अलग-अलग regions की economies की भागीदारी बढ़ी है।

ऐसे में इसके सामने opportunities भी हैं और challenges भी।

एक तरफ member countries के बीच trade, investment, technology और development cooperation बढ़ाया जा सकता है।

दूसरी तरफ अलग-अलग देशों की foreign-policy priorities और economic interests में अंतर भी है।

भारत के सामने चुनौती यही होगी कि वह BRICS को ऐसा platform बनाने में योगदान दे जहां cooperation practical हो और member countries के बीच trust मजबूत हो।

नई दिल्ली घोषणा में BRICS नेताओं ने political and security, economic and financial तथा cultural और people-to-people cooperation के क्षेत्रों में सहयोग मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

भारत के युवाओं के लिए इसका क्या मतलब है?

BRICS Summit और Bharat Innovates जैसी पहल को केवल international politics की खबर समझकर छोड़ देना सही नहीं होगा।

इनका असर भारत के युवाओं और आने वाली economy पर भी पड़ सकता है।

अगर भारत technology, innovation और manufacturing में global partnerships बढ़ाता है, तो आने वाले वर्षों में नए businesses और employment opportunities पैदा हो सकती हैं।

Deep-Tech startups, AI, semiconductor, space technology, green energy और digital services जैसे sectors में भारत के युवाओं के लिए बड़े

अवसर बन सकते हैं।

इसलिए BRICS का मतलब केवल नेताओं की बैठक नहीं है।

यह उस global economy की दिशा तय करने की कोशिश भी है जिसमें भारत के करोड़ों युवा आने वाले वर्षों में काम करेंगे।

एक तस्वीर और हजारों संदेश

भारत मंडपम में प्रधानमंत्री मोदी के साथ BRICS देशों के नेताओं की तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में रहीं।

लेकिन इन तस्वीरों को सिर्फ political symbolism के रूप में देखना शायद अधूरा होगा।

इन तस्वीरों के पीछे भारत की बदलती diplomatic और economic position की कहानी भी है।

एक समय था जब भारत international institutions में अपने लिए अधिक representation की मांग करता था।

आज भारत उन platforms पर leadership की भूमिका निभा रहा है।

यह बदलाव एक दिन में नहीं आया।

इसके पीछे भारत की economic growth, technology, diplomacy, युवा शक्ति और लंबे समय से चली आ रही global engagement की प्रक्रिया है।

आगे का रास्ता आसान नहीं है

हालांकि भारत की बढ़ती global role के बीच चुनौतियां भी कम नहीं हैं।

Economic inequality, employment, climate change, geopolitical tensions, energy security और technology regulation जैसी चुनौतियां भारत के सामने भी हैं।

इसलिए किसी भी international summit की सफलता केवल बड़ी तस्वीरों या घोषणाओं से तय नहीं होती।

असल सफलता तब होगी जब international cooperation का फायदा ground level पर आम लोगों तक पहुंचे।

अगर बेहतर trade opportunities बनती हैं, नई technologies आती हैं, रोजगार बढ़ता है, startups को global markets मिलते हैं और developing countries की आवाज international institutions में मजबूत होती है, तभी इस तरह के platforms की वास्तविक सफलता मानी जाएगी।

भारत की कहानी अभी बाकी है

BRICS Summit 2026 भारत के लिए एक महत्वपूर्ण diplomatic moment जरूर रहा, लेकिन इसे मंजिल नहीं बल्कि एक पड़ाव के रूप में देखना चाहिए।

भारत के सामने आने वाले वर्षों में खुद को एक मजबूत, innovative और sustainable economy के रूप में स्थापित करने की बड़ी चुनौती है।

भारत मंडपम में दुनिया के नेताओं का एक साथ आना एक symbolic तस्वीर जरूर है।

लेकिन असली तस्वीर उस भारत की होगी जो आने वाले वर्षों में अपने युवाओं को opportunities देगा, अपनी technology को दुनिया तक पहुंचाएगा, अपनी

manufacturing क्षमता बढ़ाएगा और global challenges के समाधान में सक्रिय भूमिका निभाएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने जिस “New India” की बात की है, उसकी असली परीक्षा अब इसी बात से होगी कि international मंचों पर मिली पहचान को भारत के आम नागरिक के जीवन में कितनी मजबूती से बदला जा सकता है।

आज भारत की ओर दुनिया की नजर है।

और शायद इस पूरे BRICS Summit का सबसे बड़ा संदेश यही है—

भारत अब दुनिया के साथ चलने वाला देश ही नहीं,

दुनिया की दिशा तय करने वाली चर्चाओं में अपनी आवाज मजबूत करने वाला देश भी बन रहा है।

भारत मंडपम से उठी यह तस्वीर सिर्फ दो दिनों के सम्मेलन की तस्वीर नहीं है।

यह उस भारत की तस्वीर है जो अपनी जड़ों से जुड़ा रहकर भविष्य की ओर बढ़ना चाहता है।

भारत बढ़ेगा, तो दुनिया के विकास में भी उसका योगदान बढ़ेगा। 

निष्कर्ष

18वां BRICS Summit भारत के लिए diplomacy, innovation और global cooperation के लिहाज से एक महत्वपूर्ण अवसर रहा। भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस summit ने यह दिखाया कि भारत अब केवल global discussions का हिस्सा बनने की कोशिश नहीं कर रहा, बल्कि उन discussions को दिशा देने की क्षमता भी विकसित कर रहा है।

भारत मंडपम में जुटे दुनिया के नेताओं से लेकर Bharat Innovates में मौजूद भारतीय innovators तक—इस पूरे आयोजन में नए भारत की दो तस्वीरें साथ दिखाई दीं।

एक तस्वीर diplomacy की थी। दूसरी तस्वीर innovation की। और इन दोनों के बीच खड़ा था—भारत। 🇮🇳

क्योंकि नया भारत सिर्फ सपने नहीं देख रहा, वह दुनिया के सामने अपने सपनों को आकार देने की क्षमता भी दिखा रहा है।

 

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